बताते चलें 22 जनवरी की सुबह 11 बजे शाहजहांपुर सदर कोतवाली के पास से ही मोहल्ला बिसरात निवासी सुरेश चंद्र गुप्ता की 19 वर्षीय नातिन शिखा गुप्ता और उसकी मित्र व किराएदार 22 वर्षीय खुशबू पुत्री रमेश चंद्र सिंह का अपहरण कर लिया गया था। 85 करोड़ की संपत्ति के विवाद में शिखा के मौसेरे भाई राहुल पुत्र प्रमोद निवासी गांव महेशरा ने अपने साथियों के सहयोग से दोनों को उठाया था। परिजनों की सूचना पर पुलिस ने राहुल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया था। पूछताछ में उसने शिखा और उसकी सहेली खुशबू की अपहरण की रात नौ बजे गला दबा कर हत्या कर लाशें धनौरा क्षेत्र के गांव शेरपुर स्थित पथवारी पुल से रामगंगा पोषक नहर में फेंके जाने की बात कुबूली थी।
पिछले दस दिन से शाहजहांपुर सदर कोतवाली पुलिस शेरपुर से गजरौला के गांव चकनवाला तक नहर खंगाल रही थी लेकिन लाशें नहीं मिलीं। पुलिस को गजरौला के बसंत विहार कालोनी में एक खाली प्लाट में युवतियों के अधजले कुछ कपड़े जरूर मिले थे। छह फरवरी की रात गांव चकनवाला में रामगंगा पोषक नहर में एक युवती का शव उतराता देख ग्रामीणों ने पुलिस को खबर दी। इस पर मौके पर पहुंची थाना पुलिस ने शव को नहर से बाहर निकलवाया। शव सड़ने से बुरी तरह क्षतविक्षत हो चुका था। जिससे पहचान नहीं हो पा रही थी। रविवार को परिजनों ने सरकारी अस्पताल पहुंच कर पहने हुए कपड़ों से उसकी शिनाख्त शिखा के रूप में की।
पीड़ित नाना की ओर से राहुल समेत चार अज्ञात के खिलाफ अपहरण और साक्ष्य मिटाने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया गया है। हत्या की बात राहुल ने पहले ही कबूल कर ली थी लेकिन शव नहीं मिला था। शिखा का शव मिलने पर हत्या की पुष्टि हो गई है। जनपद संभल के थाना असमोली क्षेत्र के बदमाशों की मदद से राहुल ने इस वारदात को अंजाम दिया है। विवेचना के दौरान राहुल के भाई राजन और बहनोई पंकज निवासी रजबपुर थाना जोया जनपद अमरोहा के नाम प्रकाश में आए हैं, जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। खुशबू के शव की तलाश जारी है।
- बीके चौहान, विवेचक, सदर कोतवाली, शाहजहांपुर
संपत्ति थी हत्या की वजह
शिखा अपने माता-पिता की इकलौती बेटी थी और बीए प्रथम वर्ष में पढ़ रही थी। नाना सुरेश चंद्र गुप्ता नगरनिगम से रिटायर हुए हैं। उनके पास तिलहर और शाहजहांपुर शहर में कुल करीब 85 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है। इसकी वसीयत उन्होंने शिखा को कर रखी थी। इस पर शिखा के मौसेरे भाई राहुल ने उसे ठिकाने लगाने की योजना बनाई और संभल निवासी दो पेशेवर कातिलों को उसकी सुपारी दी। डेढ़ लाख रुपये में सुपारी तय हुई और एक लाख रुपये कातिलों को दिया गया था। राहुल ने शिखा को उसकी सहेली कटिया टोला निवासी कोमल के मार्फत मिलने के लिए सदर बाजार बुलवाया था। शिखा बिसरात वाले मकान में किराए पर रहने वाली निगोही की मूल निवासी खुशबू के साथ स्कूटी से पहुंची थी। तीनों ने नेशनल हाईवे पर बरेली मोड़ के पास एक ढाबे में खाने का प्रोग्राम बनाया। कोमल ने स्कूटी पर तीन लोग एक साथ न जा पाने की स्थिति में मोबाइल पर राहुल से संपर्क किया तो सदर बाजार थाना के सामने ही इनोवा की व्यवस्था हुई। तीन लड़कियां इनोवा से ढाबे तक गईं जहां सुपारी किलरों संग राहुल पहुंचा। वहां बरेली तक लांग टूर पर थोड़ी देर के लिए मस्ती करके लौटने का प्रोग्राम बना लेकिन कोमल उसमें शामिल नहीं हुई। इनोवा से उसे बरेली मोड़ पर छोड़ दिया गया। बाकी लोग बरेली की ओर गए। गाड़ी बरेली नहीं रुकी बल्कि रामपुर क्रास कर गजरौला गई। वहां रामगंगा नहर की ओर वीराने में जाने के लिए इनोवा को छोड़ कर डीसीएम को किराए पर लिया गया। धनौरा के पास दूध और सब्जी मंडी से आगे नहर पर बने शेरगढ़ पुल पर डीसीएम रोककर कातिलों ने पहले शिखा को नीचे खींचा और मफलर से गले पर फंदा कस दिया। उसके दम तोड़तेे ही लाश पुल से नहर में फेंक दी गई। फिर खुशबू की हत्या उसके ही दुपट्टे से कर उसकी लाश भी नहर में फेंक दी गई।