फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चोर गिरोह का सरगना गिरफ्तार, तीन फरार

Fri, 14 Oct 2016 11:44 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
शुक्रवार को शाहजहांपुर के छोटी लाइन वाले रेलवे स्टेशन पर संदिग्ध हालत में बैग लेकर बैठे चार लोगों को जीआरपी की टीम ने ललकारा तो वे भागने लगे। रेलवे पुलिस ने इनमें से एक को दौड़ाकर पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम रवींद्र बताया। वह बरेली के फरीदपुर कस्बे का निवासी है। उसके पास से चार सोने की अंगूठी बरामद हुई हैं। उसके तीनों फरार साथी भी फरीदपुर के ही निवासी हैं। कोर्ट में पेश किए जाने पर उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
विज्ञापन

 जीआरपी ने पूछताछ की तो उसने कबूला कि वह इससे पहले भी कई बार पकड़ा जा चुका है। उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई हो चुकी है। चंद महीने पहले डीजीपी रेलवे के रिश्तेदार का बैग भी उसने लखनऊ-शाहजहांपुर रूट पर छीना था। बाद में वह शाहजहांपुर में पकड़ा गया था। जमानत पर छूटने के बाद फिर से चोरी की वारदातों में सक्रिय हो गया।
बकौल जीआरपी रवींद्र ने बताया कि 21 सितंबर को उसने मुंबई से शाहजहांपुर लौट रही 65 वर्षीय कुंती बाथम का बैग चोरी किया था। बैग में करीब चार लाख के जेवर थे। शाहजहांपुर के सब्जी मंडी इलाके में रहने वाली कुंती बाथम का पूरा परिवार महाराष्ट्र के रायगढ़ में रहता है। बीते दिनों वह मुंबई से लखनऊ के रास्ते शाहजहांपुर लौट रही थीं। उनके पास चार बैग थे। लखनऊ से ट्रेन छूटते ही वह अपने तीन साथियों के संग उनके पास आकर बैठ गया। रोजा स्टेशन पर गाड़ी पहुंचते ही कुंती बाथम अपने बैग गेट की ओर ले जाने को उठीं तो चारों युवकों ने मदद का नाटक करते हुए जेवर वाला बैग लेकर भाग निकले। शुक्रवार को जीआरपी टीम के चेकिंग के दौरान भागे रवींद्र के साथियों में फरीदपुर के नहर कोठी निवासी मुनीश और जितेंद्र के अलावा हेमुपुरा निवासी देवराज शामिल हैं। इस गिरोह के चोरी के आभूषण खुले बाजार में खपाने में लिप्त फरीदपुर के एक सुनार की भी जीआरपी को तलाश है। शाहजहांपुर जीआरपी थानाध्यक्ष जयशंकर सिंह ने बताया कि फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
विज्ञापन

लखनऊ-बरेली के बीच पांच गिरोह सक्रिय
जीआपी की पूछताछ में रवींद्र ने कई अहम जानकारी दी हैं। उसने कई साल पहले अलीगढ़ जाकर ताला तोड़कर चोरी करने की कला सीखी थी। वहां से लौटकर उसने करीब नौ लोगों को यह काम सिखाया। बाद में सभी ने अपने गिरोह बना लिए। इस समय लखनऊ-शाहजहांपुर-बरेली रूट पर पांच गिरोह सक्रिय हैं। इनमें 42 लोग शामिल हैं।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें