जगेन्द्र के परिजनों का बीते दस दिनों से चल रहा धरना मंगलवार दोपहर को खत्म हो गया। धरनास्थल पहुंचे एमएलसी जयेश प्रसाद, डीएम शुभ्रा सक्सेना व सपा जिलाध्यक्ष तनवीर खां ने जगेन्द्र की पत्नी को 30 लाख रुपए का चेक सौंपा और दोनों बेटों को शस्त्र लाइसेंस दिए। इसके बाद जगेंद्र के पिता सुमेर सिंह ने मुख्यमंत्री और एमएलसी की तारीफ करते हुए डीआईजी के नेतृत्व में हो रही जगेंद्र प्रकरण की जांच पर संतोष जताया और धरना समाप्त करने की घोषणा कर दी। इस मौके पर देवरिया के एमएलसी रामू द्विवेदी, शाहजहांपुर नगरपालिका परिषद अध्यक्ष और एसपी बबलू कुमार भी मौजूद रहे।
मंगलवार सुबह से धरनास्थल पर जगेंद्र की पत्नी सुमन सिंह, बेटी रचना और बहन लवली मौजूद थीं। दोपहर में एमएलसी के आने की जानकारी पाकर उनके समर्थक भी मौके पर पहुंचने शुरू हो गए। लगभग ढाई बजे एमएलसी के साथ अधिकारियों का काफिला धरनास्थल पर पहुंचा। जगेंद्र की पत्नी को उनके नाम का 30 लाख रुपये का चेक सौंपने के बाद बेटों राजन उर्फ राघवेंद्र को रायफल और राहुल उर्फ पुष्पेंद्र को रिवाल्वर का लाइसेंस दिया गया। इसके बाद सुमेर सिंह ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है। परिवार की मदद और सुरक्षा की मांग भी पूरी हो गई है। उनकी जमीन भी कब्जा मुक्त हो गई है। इस कारण अब धरना-प्रदर्शन का कोई मतलब नहीं रह जाता है। लिहाजा धरना समाप्त किया जाता है।
जगेंद्र के परिवार की मदद में टिकट का चक्कर नहीं: जयेश
खुटार। धरनास्थल पर पत्रकारों ने बसपा से एमएलसी होने के बाद भी सपा के आरोपी राज्यमंत्री की मदद के सवाल पर जयेश प्रसाद ने कहा कि जगेंद्र के मामले का पार्टी से कोई लेना देना नहीं है। खुटार के लोग उनके परिवार की तरह हैं। जगेंद्र के परिवार की मदद भी उन्होंने अपना परिवार मान कर की है। सपा में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी तक उनका ऐसा कोई विचार नहीं था, लेकिन जगेंद्र प्रकरण में मुख्यमंत्री से उनकी बात हुई तो उनका रवैया बेहद सकारात्मक लगा।
मुख्यमंत्री और दोनों एमएलसी के आभारी : सुमेर
खुटार। मेरी रविवार को एमएलसी जयेश प्रसाद से बात हुई थी। मेरे उनसे पारिवारिक संबंध हैं। रात में अचानक एमएलसी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने सुबह मिलने का समय दे दिया है। परिवार के जो लोग मुख्यमंत्री से मिलना चाहते हों वह रात में ही लखनऊ के लिए रवाना हो जाएं। इस कारण किसी को जानकारी नहीं दे सका। एमएलसी जयेश प्रसाद और रामू द्विवेदी के सामने मुख्यमंत्री ने पुत्र जगेंद्र की मृत्यु पर गहरा दुख जताया और उनकी बात सुनी। उन्होंने मदद के ऐलान सहित डीआईजी बरेली से जांच की बात बताई। अन्य समस्याओं के निस्तारण के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। सुमेर सिंह ने कहा कि मदद और दुख की घड़ी में साथ देने के लिए वह मुख्यमंत्री और दोनों एमएलसी के आभारी हैं।
मुख्यमंत्री को दी जानकारियां : राहुल
खुटार। बाबा सुमेर सिंह के साथ लखनऊ गए जगेंद्र के पुत्र राहुल ने कहा कि मुख्यमंत्री ने एक घंटे तक पूरी बात सुनी। मैंने अपने पिता की मौत के मामले में मुख्यमंत्री को कई जानकारियां दीं। मुख्यमंत्री ने बताया कि डीआईजी से वह कई जांचें करा चुके हैं और जगेंद्र प्रकरण की भी निष्पक्ष जांच होगी। इस पर धरना समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। जगेंद्र की पत्नी सुमन सिंह, बड़े पुत्र राहुल ने भी कहा कि डीआईजी की जांच से उन्हें न्याय मिलेगा। इस कारण धरना समाप्त कर जांच समाप्त होने का इंतजार करेंगे।
धरनास्थल पर तीन दिन में पल-पल बदला नजारा
खुटार। जगेंद्र सिंह की मौत के मामले की सीबीआई जांच कराने, आरोपी राज्यमंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा सहित अन्य नामजदों को जेल भेजने, परिवार को आर्थिक सहायता देने, जगेंद्र के पुत्रों को नौकरी देने आदि मांगों को लेकर जगेंद्र के परिवार के लोग 14 जून से धरना प्रदर्शन पर बैठे थे। परिवार के लोगों को बसपा, भाजपा, कांग्रेस के नेताओं के साथ ही कई पत्रकार और सामाजिक संगठनों ने भी समर्थन दिया था। कई जनपदों के पत्रकार धरना-प्रदर्शन में शामिल रहे। पूर्व केंद्रीय मंत्री कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद, भाजपा नेता रागिनी सिंह, देवेश गुप्ता, बसपा जिलाध्यक्ष उदयवीर सिंह सहित तमाम नेता धरना स्थल पर पहुंचे और परिवार के लोगों को न्याय दिलाने का आश्वासन देकर सीबीआई जांच की मांग उठाई, लेकिन तीन दिन में धरना स्थल पर पल-पल बदले नजारे देखने को मिले।
21 जून , दिन रविवार
सुबह नौ बजे डीआईजी आरकेएस राठौर धरना स्थल के सामने से होते हुए सीधे जगेंद्र सिंह के घर पहुंचे। उनके आने के समय धरना स्थल पर जगेंद्र के पिता सुमेर सिंह, पुत्र राजन आदि बैठे थे। डीआईजी के जाने के बाद भाजपा नेता रागिनी सिंह, कांग्रेस नेता संतोष शर्मा सहित पत्रकार संगठनों सहित तमाम लोग धरना स्थल पहुंचे और परिवार के लोगों को मदद का भरोसा दिलाया। निघासन के पत्रकारों ने परिवार को 6500 रुपये की मदद दी। जगेंद्र के पुत्र राहुन ने राज्यपाल के सचिव से फोन पर बात की और मिलने का समय मांगा।
22 जून, दिन सोमवार
जगेंद्र सिंह के परिवार के साथ रोजाना धरने पर बैठने वाले लोग मौके पर पहुंचे तो पता चला कि जगेंद्र के पिता और पुत्र रात में ही लखनऊ चल गए हैं। चर्चा रही कि मामले में समझौता हो गया है। इससे धरने पर बैठने वालों को गहरा धक्का लगा। उनको मलाल इस बात का था कि जिस परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर वह हर मामले में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े थे, वही लोग उनको बिना बताए लखनऊ चले गए। कांग्रेस की संतोष शर्मा वापस घर लौट गईं, तो भाजपा की रागिनी सिंह शाहजहांपुर से ही खुटार नहीं आईं।
23 जून, मंगलवार
मंगलवार सुबह धरना स्थल पर जगेंद्र की पत्नी, पुत्री मौजूद रहीं। पता चला कि जगेंद्र के पिता सुमेर सिंह और छोटा पुत्र राहुल लखनऊ से नहीं लौटे हैं और बड़ा पुत्र राघवेंद्र शस्त्र लाइसेंस के सिलसिले में जिला मुख्यालय गया है। दोपहर तक यही स्थित रही। इसके बाद जानकारी मिली कि एमएलसी जयेश प्रसाद के साथ डीएम शुभ्रा सक्सेना धरना समाप्त कराने आ रही हैं। जानकारी पाकर एमएलसी के समर्थक मौके पर जमा होना शुरू हो गए। सपा के कई नेता भी मौके पर पहुंच गए और मुख्यमंत्री का गुणगान करने लगे।