शादीशुदा और दो बच्चों की मां कोमल का डेढ़ साल पहले मनोज से हुई थी दोस्ती
पीलीभीत से बरेली होकर शाहजहांपुर पहुंचते ही पुलिस ने दंपति को हिरासत में लिया
पति सुरेंद्र ने मोबाइल पर पत्नी कोमल का लव अफेयर पकड़ा तो उसे जमकर धुना था
कांशीराम कालोनी निवासी इस दंपति ने पूछताछ में कत्ल की रोचक कहानी बयां की। इनका पांच साल पहले प्रेम विवाह हुआ था। पति सुरेंद्र कुमार सक्सेना हथौड़ा क्षेत्र में अस्पताल की किट बनाने वाली निजी कंपनी का श्रमिक है, इनके दो बच्चे भी है। कोमल का मायका कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला सिंजई में रहने वाले मोबाइल विक्रेता मनोज साहू की दुकान के पास ही है। यह अक्सर मायके आया-जाया करती थी और इसका पति भी उसकी दुकान से मोबाइल रिचार्ज करवाता था। करीब डेढ़ साल पहले कोमल की मनोज से दोस्ती हुई और फिर विवाहेतर संबंध भी बने। उसी क्रम में दोनों की मोबाइल पर रोजाना ही देर तक बातें होती रहती थीं। सर्विलांस टीम ने अपनी तफ्तीश में इस तथ्य की पुष्टि की और उसी के बाद पुलिस टीमें कोमल की बरामदगी मेें जुटीं। पूछताछ में कोमल ने बताया कि वह अक्सर अपने पति के मोबाइल से ही छुप-छुपाकर मनोज से बातें कर लेती थी और कत्ल से एक दिन पहले सुरेंद्र के सामने ही मनोज की कॉल आ गई। तभी सुरेंद्र के सामने पत्नी प्रेमलीला का भेद खुला तो काफी आग बबूला हुआ और उसका गला घोंटने लगा। कोमल ने काफी मिन्नतें कीं तो उसने अपने साले को साथ लिया और उससे मोबाइल पर कॉल करवाकर इसके प्रेमी को एसएस कॉलेज के पास नहर किनारे मिलने के लिए बुलाया। 21 दिसंबर की रात थी, समय करीब नौ बजे का था। मनोज अपने दोस्त रचित के साथ वहां बाइक से पहुंचा तो साले-बहनोई ने नुकीले रॉड और डंडे से उसके सिर पर तीन जोरदार वार किए। नुकीला राड सिर और गले में धंस गया। उससे चीरा वाला निशान बना जिससे पुलिस को गोली लगने का भी संदेह हुआ। अचानक हुए हमले से रचित घबराकर मौके से भाग निकला और मनोज के दम तोड़कर जमीन पर धराशाई होने पर कोमल घर लौट गई, जबकि सुरेंद्र और किशन मृतक की बाइक लेकर मौके से भाग निकले। उस रात साढ़े 11 बजे पुलिस को रक्तरंजित लाश मिली थी और उसके बाद पड़ताल शुरू की गई थी।
साले-बहनोई बाइक का नंबर प्लेट बदलकर घूमते रहे और रिश्तेदारी में भी नहीं गए, ताकि पुलिस की पकड़ में ना सकें, लेकिन सर्विलांस निगरानी में मिले तथ्यों के आधार पर पुलिस ने जब कोमल का ब्योरा खंगाला तो वह अपने पति संग पीलीभीत में परिचित के यहां जाकर छिपे। इस बीच मृतक के पिता रामकुमार साहू द्वारा फर्रुखाबाद निवासी बेटे के साले राजीव और आलोक के खिलाफ नामजद एफआईआर होने से ये निश्चिंत हो गए कि अब पुलिस इन्हें नहीं पकड़ेगी तो ये घर को लौटे। एसपी बबलू कुमार ने बताया कि फरार किशन की तलाश में भी टीमें रवाना हो गई हैं और वह भी जल्द पकड़ा जाएगा। प्रेसवार्ता में एसपी सिटी राजेश कुमार, एसपी देहात मनीराम यादव, एएसपी अनुराग वत्स आदि मौजूद थे।
कत्ल का राज खोलने वाली टीम
चौक कोतवाली प्रभारी इंस्पेक्टर केके तिवारी, एसआई शबाबुल हुसैन, कांस्टेबल संजीव और नीलेश ने इस रहस्यमय हत्याकांड का राज खोला। इसमेें सक्रिय सहयोग करने वालों में एसपी सिटी राजेश कुमार, रोजा थानाध्यक्ष विनोद कुमार मिश्रा, सदर बाजार कोतवाली के हेड कांस्टेबल राजेश कुमार, सर्विलांस सेल के कांस्टेबल राजीव कुमार, जय प्रकाश, अजय चौधरी और विजय भान शामिल थे।
काल डिटेल से सुलझी गुत्थी
शाहजहांपुर। मृत मनोज, कोमल और इसके पति सुरेंद्र के मोबाइल कॉल डिटेल से पुलिस की सर्विलांस सेेल ने जो तथ्य जुटाए उसके विश्लेषण में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए तो निर्दोष नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी की तैयारी कर चुकी पुलिस ने राहत की सांस ली। वजह यह कि मृतक के पिता ने बेटेे से सालों के संबंध अच्छे न होने के अंदेशे पर ही नामजद एफआईआर कराया था, लेकिन नामजद आरोपी घर छोड़कर नहीं भागे और मनोज से जुड़े अपने सभी ब्योरे सबूत के साथ प्रस्तुत कर रहे थे। उसके चलते तफ्तीश मेें जुटी टीम खासी भ्रमित हो गई थी। लेकिन सर्विलांस सेल की रिपोर्ट ने भ्रम की स्थिति मिटा दी। पता चला कि गत डेढ़ वर्ष से मनोज और कोमल के बीच रोजाना ही अस्वाभाविक ढंग से देर तक कई बार बातें होती रही हैं। एसपी बबलू कुमार ने बताया कि इसी क्लू ने कत्ल के असल वजह तक वैैज्ञानिक साक्ष्यों के सहारे पहुुंचने में मदद की। घटनास्थल से फील्ड यूनिट द्वारा जुटाए गए सामान और आलाकत्ल पर लगे खून के निशान को फॉरेंसिंक लैब भेजा जा रहा है।