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पांच हत्यारोपियों के लिए उम्रकैद

Fri, 18 Dec 2015 11:49 PM IST
शाहजहांपुर।
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जिले के खुदागंज थाना क्षेत्र में 20 साल पहले मुकदमेबाजी की रंजिश में असलहे और लाठियों से लैस होकर धावा बोलकर एक व्यक्ति की हत्या करने और दो को गंभीर रूप घायल करने के मामले में छह दोषसिद्ध अभियुक्तों में से पांच को अपर सत्र न्यायाधीश भानुदेव शर्मा ने शुक्रवार को उम्रकैद की सजा सुनाई। एक अभियुक्त की सुनवाई के दौरान ही मौत हो गई थी। पांचों अभियुक्तों पर 52-52 हजार रुपये का जुर्माना भी बोला गया है।
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वर्ष 1995 में दो अगस्त की शाम साढ़े चार बजे कंधरापुर नवदिया गांव के पूर्व प्रधान शिशुपाल सिंह, उनके भतीजे उदयवीर सिंह और गांव के ही बद्री खुदागंज बाजार से लौट रहे थे। सायं करीब साढ़े चार बजे खुदागंज के मझला चौराहे के पास असलहे और लाठियों से लैस गांव के ही अवधेश, रमनपाल सिंह, मदनपाल सिंह, हरीश, जयचंद और महेश ने घेर लिया और फायर किए। बद्री के सिर में गोली लगने से मौत हो गई। जबकि जख्मी हुए पूर्व प्रधान की रायफल लेकर हमलावर भाग निकले। पूर्व प्रधान का भतीजा भी इस हमले में गंभीर रूप से जख्मी हुआ और उसी की तहरीर पर थाने में केस आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 302, 307, 323, 394, 411 और 27 आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज हुआ। वादी की ओर से मुकदमे की पैरवी सरकारी वकील संजय सिंह तोमर ने की। अपर सत्र न्यायाधीश ने गवाहों के बयान और साक्ष्यों के अवलोकन के आधार पर बीते बुधवार को आरोपियों को दोषसिद्ध अभियुक्त करार दिया और फैसला शुक्रवार तक के लिए सुरक्षित रखा था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान एक अभियुक्त अवधेश सिंह की मौत हो गई थी।
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जानलेवा हमले में एक को 10 वर्ष की कैद
दूसरे दोषसिद्ध अभियुक्त के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी
18 साल पहले शहर में दिनदहाड़े हुई घटना में क्रास केस दर्ज हुआ था, दूसरा पक्ष बरी
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। शहर के छोटी सब्जी मंडी के पास स्थित तलौआ मैदान में 18 साल पहले दिनदहाड़े जानलेवा हमले के मामले में दोष सिद्ध अभियुक्तों में एक को अपर सत्र न्यायाधीश सप्तम एहसानुल्लाह खान ने शुक्रवार को 10 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। फैसला सुनाए जाने के दौरान खुद को पीजीआई लखनऊ में इलाज के लिए भरती होने का हवाला देते हुए गैरहाजिर दूसरे दोषी सिद्ध आरोपी अंशुमान गुप्ता के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया गया। सजा पाए अभियुक्त पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगा है और साथ ही उसे हमले में घायल कमल यादव को बतौर प्रतिकर 25 हजार रुपये अदा करने का आदेश जारी हुआ है। इस घटना के बाबत आरोपियों की ओर से दर्ज कराए गए क्रास केस को कोर्ट ने खारिज करते हुए दूसरे पक्ष के आरोपियों को बरी कर दिया।
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इस बहुचर्चित घटना के फैसला सुनाए जाने के दौरान कचहरी में खासी भीड़भाड़ रही। घटना 31 दिसंबर 1997 को सदर बाजार कोतवाली क्षेत्र के तलौआ सब्जी मंडी के पास दोपहर साढ़े 12 बजे हुई थी। उस मंडी के ठेकेदार कमल सिंह यादव मौके पर ठेका वसूलने के लिए कटिया टोला निवासी गिरंद्र सिंह उर्फ गिरन, फूल सिंह और लालाराम के साथ मौके पर गए थे। तभी मंडी के पास ही रहने वाले अंशुमान गुप्ता, आशु गुप्ता और अग्निवेश गुप्ता ने इन्हें रोका और मंडी शुल्क वसूलने पर ऐतराज किया। उसी पर विवाद होते हुए ही आशु ने कमल पर ताबड़तोड़ फायर झोक दिया। कमल के लहूलुहान होकर जमीन पर गिरते ही मंडी में भगदड़ मच गई और दहशत का माहौल बन गया। बाद में घायल को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भरती कराया गया और बाद में बरेली में उपचार हुआ। पुलिस ने घायल की मां की तहरीर के आधार पर आईपीसी की धारा 307 के तहत केस दर्ज किया लेकिन बाद में आरोपियों की ओर से ठेकेदार के खिलाफ आईपीसीकी धारा 307, 504 और 506 के तहत  नामजद क्रास केस दर्ज कराया गया।
वारदात के अगले वर्ष 17 अप्रैल 1998 को हमला करने के आरोपी आशु की हत्या हो गई और पुलिस की ओर से कोर्ट में 16 जून 1998 को दायर चार्जशीट में उसी कारण उसका नाम हटा दिया गया और दो ही आरोपी बताए गए। वादी की ओर से सरकारी वकील मनफूल सिंह वर्मा ने कुल छह गवाह सुनवाई के दौरान पेश कराए।
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