नब्बे के दशक से कटरी में डकैतों का राज रहा है। डकैतों के भय से लोग दिन में भी कटरी क्षेत्र में जाने से डरते थे। कटरी में फिरौती के लिए सैकड़ों अपहरण हुए। दर्जनों लोग डकैतों की गोलियों को शिकार हुए। कल्लू गिरोह के आखिरी सदस्य जंटरू की गिरफ्तारी के बाद अब कटरी डकैतों से मुक्त हो गई है। आए दिन अफवाहें उड़ती थीं कि जंटरू ने कटरी में गैंग की कमान संभाल ली है।
नब्बे के दशक में बड़े लल्ला और रानी ठाकुर ने कटरी की कमान संभाली थी। बड़े लल्ला गिरोह ने कटरी में बड़ी-बड़ी वारदातों को अंजाम दिया थआ। इसी गिरोह में कल्लू भी शामिल हो गया था। दशक के अंत में बड़े लल्ला और रानी ठाकुर पुलिस के हाथों मुठभेड़ में मारे गए। इसके बाद गैंग की कमान कल्लूू ने संभाल ली। देखते ही देखते कल्लू कटरी किंग के नाम से विख्यात हो गया। आसपास के जनपद बदायूं, फर्रुखाबाद, कन्नौज एटा की कटरी में कल्लू का डंका बजने लगा। कल्लू की कई बार पुलिस से मुठभेड़ हुई। कल्लू ने 19 पुलिस कर्मियों को अपना निशाना बनाया। कल्लू गैंग अपहरण और लूट की घटनाओं को अंजाम देता था। मोटी रकम वसूलने के बाद अपहृत को छोड़ दिया जाता था। कल्लू के ऊपर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया। कल्लू की मौत के बाद गैंग की कमान चचुआपुर निवासी नरेशा धीमर ने संभाल ली। नरेशा गैंग में उसका साला जंटरू भी शामिल हो गया। उधर, मिर्जापुर क्षेत्र के गांव ऊधरापुर में रहने वाला नरेशा धीमर भी एक गैंग चला रहा था। बदमाशों की खौफ से कटरी में रहने वाले लोग अपने घरों ने से नहीं निकलते थे। 2008 में नरेशा धीमर पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। इसके साथ ऊधरापुर के नरेशा धीमर का भी सफाया कर दिया गया। इन दोनों के ऊपर 50-50 हजार रुपये का इनाम था। इनकी मौत के बाद गैंग के ज्यादातर सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस गैंग का शातिर सदस्य जंटरू ही पुलिस के लिए सिर दर्द बना हुआ। पुलिस कई सालों से जंटरू की तलाश में जुटी थी। जंटरू की गिरफ्तारी के बाद कटरी में डकैतों का अंत हो गया। कटरी क्षेत्र में रहने वाले लोग अब भयमुक्त होकर अपना जीवन जी सकेंगे।