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झोलाछाप कर रहे लोगों की सेहत से खिलवाड़

Wed, 13 May 2015 11:27 PM IST
शाहजहांपुर
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जिले में सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी की वजह से ग्रामीण क्षेत्र में झोलाछाप का कारोबार फलफूल रहा है। झोलाछाप गंभीर बीमारियों में लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर जिले में इस साल करीब 40 झोलाछाप को चिन्हित किया गया, जिसमें से नोटिस मिलने पर पांच झोलाछाप ने अपनी दुकानें बंद कर दी हैं। वहीं पिछले साल सवा सौ झोलाछाप डॉक्टरों को चिन्हित किया गया था। जिसमें 15 के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई। करीब 25 झोलाछाप ने नोटिस मिलने पर अपनी दुकानें बंद कर दीं।
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पुवायां तहसील में ठेले पर चलते हैं अस्पताल
पुवायां। सरकार मोबाइल अस्पतालों की तैयारी कर रही है, लेकिन पुवायां तहसील के कस्बों में लगने वाली हाट-बाजारों में बहुत पहले से ही मोबाइल अस्पताल चल रहे हैं। यह दूसरी बात है कि यह लोगों को लुभावनी बातें कर दवा के नाम पर ठग रहे हैं। इसके अलावा गांवों में किराने की दुकानों से ज्यादा झोलाछाप डॉक्टर दुकान खोलकर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।
कस्बों में लगने वाली साप्ताहिक बाजारों में कई मोबाइल अस्पताल आपको ठेली पर दवा बेचते हुए दिख जाएंगे। ठेली पर चल रहे अस्पतालों में काजल की बिक्री से लेकर हर प्रकार की मर्ज की दवा मौजूद रहती है। बड़े-बड़े बैनरों पर बुखार, खांसी, टीवी, दमा, काली खांसी, नामर्दी, मोतियाबिंद, कान के रोग, खाज, खुजली, दाद, एक्जिमा, दांत उखाडना, दांत के कीड़े मारने की दवा मिलने का एकमात्र स्थान लिखा देख कर लोग इनके चक्कर में फंस ही जाते हैं।
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खुटार, पुवायां और बंडा में पांच सौ से अधिक झोलाछाप डॉक्टर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। खुटार में झोलाछाप डॉक्टर के यहां इलाज के दौरान गत वर्ष गांव गंगसरा की महिला की मौत हो गई थी। इस मामले में नामजद रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। बंडा में झोलाछाप के इलाज से युवक का पैर काटना पड़ा था और दो दिन पूर्व ही एक अधेड़ की मौत हो गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

मजबूरन झोलाछाप की शरण में जाते हैं लोग
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर और अन्य स्टाफ की कमी के कारण रोगी झोलाछाप की शरण लेने को बाध्य होते हैं। पुवायां के नाहिल, खुटार के कैमहरिया सहित कई सरकारी अस्पताल में डॉक्टर नहीं हैं। तमाम बार मांग के बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता है। इसके अलावा सरकारी अस्पताल में सही से दवाएं नहीं मिलना और रोगी के साथ उपेक्षापूर्ण व्यवहार भी रोगी को झोलाछाप के पास जाने को विवश करता है।

सरकारी डॉक्टरों की कमी से झोलाछाप डॉक्टरों की मौज
जलालाबाद। नगर के सीएचसी से लेकर अल्लागंज तथा क्षेत्र के मिर्जाुपर तथा कलान ब्लाकों में स्थित पीएससी मे स्टाफ पूरा नहीं होने का झोलाछाप पूरा फायदा उठा रहे हैं। क्षेत्र के तमाम गांवों तथा कस्बों में सक्रिय झोलाछाप न केवल भरपूर कमाई कर रहे हैं, बल्कि लोगों की जान से खिलवाड़ करने मे भी पीछे नहीं रहते। कस्बों में ऐसे झोलाछाप बिना किसी भय के प्रमुख जगहों पर बाकायदा बोर्ड लगाकर प्रैक्टिस भी कर रहे हैं।  
 अभी एक साल पहले नगर के बरेली रोड पर प्रैक्टिस करने वाले ऐसे ही एक झोलाछाप के नर्सिंग होम पर सीएमओ द्वारा की गई छापामारी के बाद कई आपत्तिजनक सामग्री पाये जाने पर उसे सील कर दिया गया था, लेकिन कुछ दिनों बाद ही उक्त झोलाछाप ने नर्सिंग होम के पास ही दुकान किराये पर लेकर दोबारा अपना कारोबार शुरू कर दिया। जो मौजूदा समय भी जारी है। कस्बे के बारह पत्थर रोड, मुख्य चौराहें, बरेली और फर्रुखाबाद रोड पर कई कथित ऐसे डॉक्टर हर बीमारी का इलाज मौजूद होने का बोर्ड लगाकर खुलेआम लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। सरकारी अस्पताल मे स्टाफ की बात करें तो नगर के सीएचसी पर मौजूदा समय पर नौ डाक्टरों की जगह केवल दो ही तैनात हैं, जबकि एक संविदा के पद पर कार्यरत है। यही हाल मिर्जाुपर, कलान और अल्हागंज के अस्पतालों का है। मिर्जापुर में कई सालों से बने खड़े सीएचसी भवन स्टाफ नहीं होने की वजह से शुरू नहीं हो पाया है। सरकारी सुविधाओं के अभाव तथा प्राइवेट इलाज मंहगा होने के कारण ग्रामीण जनता की झोलाछाप की शरण में जाना मजबूरी बनी हुई है।

अभियान चलते ही गायब हो जाते हैं झोलाछाप
तिलहर। क्षेत्र में बड़ी संख्या में झोलाछाप जनता की सेहत से खिलवाड़ करने के बावजूद प्रशासन की पकड़ से बाहर रहते हैं और छापे मारी तथा चेकिंग अभियान के दौरान बड़ी सफाई से अपना बचाव कर प्रशासन को गच्चा देकर पीठ फिरते ही फिर अपनी प्रेक्टिस शुरू कर देते हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश हैं। पूर्व में भी गढ़िया रंगीन सहित कई क्षेत्रों में कुछ लोगों को चिन्हित कर कार्रवाई भी की गई है। चिकित्सा विभाग के जिला नोडल अधिकारी डॉ. नरेश पाल का कहना है कि 1972 तक रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिसनर आरएमपी के नाम से रजिस्ट्रेशन हो जाता था, लेकिन बाद में इस पर रोक लगा दी गई। बंगाली डॉक्टर के नाम से जाने जाने बाले सीएमसी डिग्री धारकों को भी पूर्व में प्रैक्टिस की अनुमति थी, लेकिन यह लोग सिर्फ साधारण बीमारियों सर्दी, बुखार, जुखाम, खांसी आदि के इलाज के लिये ही अधिकृत थे। यह भी प्रतिबंध था कि यह लोग सिर्फ डब्ल्यूएचओ द्वारा प्रमाणित दवाईयों से ही इलाज कर सकते थे। वर्तमान में इन्हें भी पंजीकरण और इलाज की अनुमति नहीं है। इसके अतिरिक्त स्त्री रोग विशेषज्ञ के नाम पर डॉक्टरी करने वाले अवकाश प्राप्त एएनएम सहायक आदि भी अधिकृत तौर पर स्त्री रोगों के इलाज के लिये अनुमन्य नहीं हैं। समय-समय पर अभियान चलाकर चैकिंग की जाती है। दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है।

स्टाफ की कमी से सीएचसी बना सफेद हाथी
तिलहर सीएचसी पर लाखों आबादी की सेहत का जिम्मा सिर्फ तीन डाक्टरों के भरोसे है। कुल स्वीकृत 12 पदों में तीन ही तैनात हैं। स्वीकृत पदों आठ के मुकाबले तीन स्टाफ नर्स चार के मुकाबल तीन फार्मेसिस्ट पूरे तहसील क्षेत्र के गढिय़ा रंगीन, डभौरा, जैतीपुर, मदनापुर, खुदागंज, कटरा निगोही, बिरसिंहपुर, बंथरा तक के मरीजों की सेहत का ख्याल रखते हैं।

झोलाछाप के खिलाफ लगातार कार्रवाई चलती रहती है। शिकायत मिलने पर इनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है। नोटिस देने के बाद भी अगर झोलाछाप अपनी दुकान नहीं बंद करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
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- नरेश पाल, डिप्टी सीएमओ, नोडल अधिकारी
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