तहसील क्षेत्र के मेटा गांव में दंपति की संदिग्ध मौत हो गई। परिजनों और ग्रामीणों के मृतकों के पोस्टमार्टम कराने से इंकार करने पर उनकी पुलिस और तहसील कर्मियों से नोकझोंक हुई।
क्षेत्रीय विधायक के मामले में हस्तक्षेप करने के बाद मृतक दंपति का बिना पोस्टमार्टम के ही पिंडर नदी के तट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
विधायक जीतराम ने बताया कि ससुराल और मायके दोनों पक्ष पोस्टमार्टम को राजी नहीं थे। उन्हें बताया गया कि पति-पत्नी ने घरेलू कलह के चलते आत्महत्या की है।
मेटा गांव का बालक सिंह (45 वर्ष) दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करता था जबकि उसकी पत्नी दीपा देवी (40 वर्ष) गांव में ही खेतों में काम करती थी। उनके चार बच्चे हैं।
बालक सिंह परिवार में भतीजे की शादी होने में शामिल होने के लिए इन दिनों घर आया हुआ था। मंगलवार की रात सब घर पर सो गए थे। बुधवार सुबह जब बच्चे जागे तो दीपा देवी का शव बिस्तर पर और बालक सिंह का शव बल्ली पर लटका मिला। सूचना पर पहुंचे परिजनों ने शव को नीचे उतारा।
परिजन और ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए मृतकों के शवों कोलेकर कुलसारी घाट पहुंच गए। तभी सूचना मिलने पर पुलिस और तहसील कर्मी भी मौके पर पहुंच गए और पोस्टमार्टम के बाद ही अंतिम संस्कार करने को कहा। ग्रामीणों के शवों का पोस्टमार्टम कराने से इंकार करने से पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
बाद में विधायक डा. जीतराम ने मामले को सुलझाया और परिजनों की मांग पर पोस्टमार्टम नहीं कराने के लिए प्रशासन को राजी किया। इसके बाद पिंडर नदी के तट पर दंपति का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
बूढ़े कंधों पर बच्चों की जिम्मेदारी
बालक सिंह दो दिन पूर्व अपने भतीजे की शादी के लिए गांव आया था। बालक के पिता 70 वर्षीय प्रताप सिंह और माता बालपा देवी 65 वर्ष पर बालक की तीन पुत्रियों हेमलता (16), सोना (13), पुष्पा (11) और पुत्र नवीन (10) वर्ष के लालन पालन और पढ़ाई लिखाई की जिम्मेदारी आ गई है।
हेमलता 12वीं, सोना नवीं, पुष्पा सातवीं और नवीन चौथी कक्षा में है। दादी बालपा देेवी कहती हैं कि हम भी कुछ साल के मेहमान हैं, हमारे बाद इन बच्चों की देखभाल कौन करेगा।