शहर के मोहल्ला रेती में वर्ष 2009 में हुए बहुचर्चित हत्या के कोशिश के मामले में सप्तम अपर सत्र न्यायालय ने बुधवार को रेलवे में तत्कालीन टीटीई पद पर तैनात अनिल अवस्थी समेत उनके परिवार के चार लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाया। साथ ही चारों ही अभियुक्तों पर 40 - 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस जुर्माने की राशि में से घटना में घायल हुए अभिषेक दीक्षित को 75 हजार रुपये और उमानाथ दीक्षित को 25 हजार रुपये बतौर क्षतिपूर्ति दिलाने का निर्देश दिया है।
पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट के अनुसार, घटना 19 अक्तूबर 2009 को रामचंद्र मिशन थाना क्षेत्र के मोहल्ला रेती में सुबह करीब साढ़े बजे हुई थी। घटना से पहले पीड़ित दीक्षित परिवार के लोगों का अवस्थी परिवार के प्रमोद से कुछ झंझट हो गया था और तभी से दूसरा पक्ष पहले पक्ष से पारिवारिक रंजिश मनाता था। घटना वाले दिन तब रेलवे में टीटीई पद पर तैनात अनिल अवस्थी रायफल लेकर, प्रमोद अवस्थी बंदूक लेकर विभोर उर्फ शिवांचल अवस्थी रिवाल्वर लेकर और श्याम कुमार अवस्थी तमंचा लेकर वादी आशुतोष दीक्षित के दरवाजे पर पहुंचे एवं दीक्षित परिवार को गंदी - गंदी गालियां देने लगे। वादी के भाई उमानाथ और भतीजा अभिषेक, पिता मुनेंद्र नाथ और पुनीत शुक्ला घर से बाहर निकले एवं गाली देने से मना किया तो चारों ने इन पर जान से मारने की नीयत से अंधाधुंध फायरिंग झोंक दी। प्रमोद अवस्थी ने बंदूक बट से उमानाथ सिर पर वारकर जमीन पर गिरा दिया जबकि अनिल अवस्थी ने रायफल से की गई फायरिंग में गोली अभिषेक के गले में लगी और वह भी जमीन पर गिर गया। दोनों को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भरती कराया गया था। घटना में मुनेंद्र नाथ और पुनीत भी अंधाधुंध फायरिंग में घायल हुए। वादी के अलावा बृजनंदन प्रसाद और शिव कुमार मिश्रा ने शोर मचाया तो आसपास से लोग मौके की ओर दौड़े जबकि आरोपी आइंदा जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से भाग निकले।
गवाहों के बयान, बचाव पक्ष के वकील और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता उर्मेश गुर्जर के तर्कों को सुनने के बाद सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश एहसानुल्लाह खान ने बुधवार को फैसला सुनाया। अभियुक्त विभोर उर्फ शिवांचल को धारा 25 आयुध अधिनियम के अंतर्गत तीन वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये के जुर्माने का दंड अलग से लगा है।