हरेवा में महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाए जाने के विरोध में विभिन्न संगठनों ने सोमवार को एकजुट होकर शहर में मौन जुलूस निकाला। बाद में पदाधिकारियों का संयुक्त शिष्टमंडल कलक्ट्रेट जाकर प्रभारी सिटी मजिस्ट्रेट एपी श्रीवास्तव से मिला और उन्हें राज्यपाल के नाम ज्ञापन देकर हरेवा की पीड़िताओं को न्याय के साथ दोषियों को कड़ी सजा दिलवाने की मांग दोहराई।
इससे पहले, मूल निवासी विचार मंच की ओर से गठित हरेवा कांड संघर्ष न्याय समिति ने घंटाघर के अंबेडकर पार्क में विचार गोष्ठी करके घटना की भर्त्सना की। इस मौके पर सुरेश चंद्र कठेरिया ने कहा कि संगठनों का विरोध किसी जाति विशेष से नहीं, बल्कि महिलाओं को बेइज्जत किए जाने को लेकर है। जगदीश प्रसाद ने कहा कि फूलन के आंसुओं और हरेवा में बहे आंसुओं में कोई फर्क नहीं किया जाना चाहिए।
कम्युनिस्ट नेता सुरेश कुमार ने कहा कि दु:शासन किसी भी जाति का हो, वह अक्षम्य है। जाति का चश्मा उतारकर देखने पर हरेवा में हुई घटना का घिनौनापन साफ नजर आता है। अयोध्या प्रसाद मौर्य ने हरेवा कांड को जातीय शोषण का विकृत रूप बताते हुए कहा कि ऐसा करने वालों ने उस मातृ शक्ति का अपमान किया, जिसकी आराधना करते आए हैं।
मौन जुलूस घंटाघर से मशीनरी मार्केट, बहादुरगंज, जेल रोड होकर कलक्ट्रेट पहुंचा। प्रभारी सिटी मजिस्ट्रेट को दिए ज्ञापन में हरेवा कांड में लिप्त सभी आरोपियों पर गंभीर धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई करने, घटना की निष्पक्ष और ईमानदार एजेंसी से जांच कराने, पीड़िताओं की सुरक्षा को उन्हें निशुल्क शस्त्र लाइसेंस देने, गांव में स्थायी पुलिस चौकी खोलने आदि मांगों का उल्लेख है। गोष्ठी और मौन जुलूस में दौलत राम, सियाराम दास, लाखन बाबू, राजपाल कठेरिया, फकीरे लाल भोजवाल, महबूब हुसैन इदरीसी, भगवंत राम आदि शामिल रहे।
अवमानना मामले में आज
हो सकती है सुनवाई
शाहजहांपुर। हरेवा मामले में संतोष की ओर से एसीजेएम प्रथम कोर्ट में दाखिल विवेचक और थाना प्रभारी के विरुद्ध न्यायालय की अवमानना के प्रार्थना पत्र पर अब दो जून को सुनवाई हो सकेगी। थाने से रिपोर्ट न आने के कारण तारीख बढ़ाई गई है।
श्रीदेवी की जमानत सुनवाई चार जून को
हरेवा प्रकरण में आरोपित श्रीदेवी की सुनवाई सोमवार को होनी थी किंतु एक पुलिस अधिकारी के छुट्टी पर होने से कागजात न आने के कारण यह सुनवाई चार जून को नियत की गई है।