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गीता की हत्या से पहले पति गांव से बाहर था

Sat, 12 Sep 2015 11:04 PM IST
अल्हागंज / शाहजहांपुर।
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 बीते बृहस्पतिवार की भोर में अल्हागंज थाना क्षेत्र के गांव रामपुर में 26 वर्षीया गीता की हत्या से पहले उसका पति धीरेंद्र घर पर नहीं था। यह बात घटना से संबंधित शक के दायरे में आए करीब आधा दर्जन लोगों की काल डिटेल के ब्योरे और उनसे अब तक हुई पूछताछ में सामने आई है। वह बीते बुधवार की रात गांव से बाहर गया हुआ था। शनिवार को भी वह रिश्तेदारी में गया था। अब कल रविवार को उसके लौटने पर नए सिरे से पूछताछ होगी। पुलिस कातिलों के बारे में अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है और धीरेंद्र से होने वाली पूछताछ के बाद ही रविवार को घटनाक्रम का खुलासा करेगी।
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घटना के संबंध में शक के दायरे में आए सात लोगों के काल डिटेल और उनकी गतिविधियों संबंधी जुटाई गई जानकारी में कुछ अहम तथ्य पुलिस को हाथ लगे हैं। अब यह साफ है कि पूरी योजना बनाकर गीता को मौत के घाट उतारने वाले कातिलों की संख्या कम से कम दो तो थी ही। इनमें से एक तो गांव का ही था, लेकिन पुलिस अभी इसके बारे में भी कुछ कहने से बच रही है। दूसरे कातिल तक पहुंचने से पहले पुलिस अपने पत्ते खोलने से बच रही है। घटना से संबंधित प्राप्त साक्ष्यों की कड़ी को मिलाकर परखा जा रहा है। शनिवार रात को नए सिरे से मृतका के ससुर धनीराम से देर तक पूछताछ की गई। उसने भी कत्ल से पहले की रात धीरेंद्र के घर पर नहीं रहने की पुष्टि कर दी।
सामूहिक बलात्कार संबंधी घटना की शिकायत धारा 156 (3) के तहत कोर्ट में दर्ज कराया जाना भी इस हत्याकांड की साजिश का एक अहम् हिस्सा है। उस पर न तो गीता के हस्ताक्षर थे और ना ही अंगूठे के निशान। सीओ जलालाबाद आदेश त्यागी ने शनिवार को भी क्षेत्र में डेरा डाले रखा। एसपी देहात शिवराम यादव ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट हुआ है कि कत्ल से पहले मृतका के साथ रेप जैसी कोई वारदात नहीं हुई थी। रविवार को सारे सच सामने आने की उम्मीद है।
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लाश की नाक का फूल कहां गया
बृहस्पतिवार की सुबह रामपुर गांव की आबादी से करीब 500 मीटर दूरी पर स्थित अनूप के खाली पड़े खंडहरनुमा मकान में बकैना के पेड़ से लटकी मिली गीता की लाश के साथ मौके पर कई अहम् दृश्य थे। लाश टंगी थी, पास में एक लोटा था और हवाई चप्पल अलग- अलग पड़ी हुई थी। लाश के पैर की बिछिया में सूखी घास लिपटी हुई थी और उसके पेटीकोट पर भी मिट्टी आदि के निशान थे। पुलिस ने बिछिया, कुंडल और पायल निकालकर घरवालों को दे दिए थे, लेकिन नाक के फूल का पता नहीं चला, जबकि वह पहने हुए थी। यह सवाल तफ्तीश में कौंधाने वाला रहा।
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