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नियम-कानूनों पर भारी धूम्रपान का शौक

Sat, 30 May 2015 11:15 PM IST
शाहजहांपुर
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तंबाकू और उससे बने उत्पादों का सेवन करने वाले लोगों की संख्या में गुणात्मक वृद्धि हो रही है। जितना सरकार इस पर लगाम लगाने की जुगत में लगी रहती है, कंपनियां और इससे जुड़ा वर्ग अपना उल्लू सीधा कर ही लेता है। महानगरों की बात करें तो युवा वर्ग अर्थात हायर एजूकेशन प्राप्त करने वाले उच्च घरानों के लाड़ले शाम को अपने साथियों से सिगरेट के छल्ले उड़ाते बड़े होटलों या बार में देखे जा सकते हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं ने भी गुटखा, बीड़ी आदि का सेवन करना शुरू कर दिया है। अब सार्वजनिक स्थलों पर खुलेआम धूम्रपान करते लोगों को देखा जा सकता है।
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इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश और केंद्र सरकार के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। ट्रेनों और बसों के अलावा होटलों, सरकारी और गैर सरकारी कार्यालयों में बीड़ी-सिगरेट पीने वालों की कमी नहीं है। जबकि सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने की साफ मनाही है और बाकायदा जुर्माना भी घोषित किया जा चुका है। सिगरेट की डिब्बी हो या फिर तंबाकू के पैकेट सभी पर धूम्रपान कैंसर होने की चेतावनी साफ छपी होती है। धूम्रपान में कुछ रोक लग सके, इसके लिए इसकी कीमतों में भी लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन परिणाम उल्टा ही सामने आ रहा है।
कचहरी-कलक्ट्रेट में तो धूम्रपान कानून की धज्जियां उड़ाई ही जा रही हैं, दुर्भाग्य तो यह है कि शिक्षण संस्थाओं में भी छात्र पान-पुड़िया खाकर पहुंचने में कोई परहेज नहीं करते, इसका एक कारण यह भी है कि गुरुजी भी इसका मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक धूम्रपान से कैंसर के अलावा कई अन्य जानलेवा बीमारियां पैदा हो रही हैं, लेकिन फिर भी लोग जागरुक नहीं हो रहे हैं। सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने वालों पर जुर्माना नहीं लगना भी इसे बढ़ावा ही दे रहा है।
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कई जानलेवा बीमारियां छोड़ जाता है धूम्रपान
दंत एवं मुख रोग विशेषज्ञ डॉ. केपी सक्सेना बताते हैं कि घरों में धूम्रपान का आम होना दुर्भाग्यपूर्ण है। पैसिव स्मोकिंग और सेकेंड हैंड स्मोकिंग उतना ही दुष्प्रभाव छोड़ती है, जितना धूम्रपान करने वाला। लड़कियों और महिलाओं में सिगरेट पीना फैशन बनता जा रहा है। महिलाओं के धम्रपान करने से उनके बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती जा रही है। डॉ. सक्सेना ने बताया कि तंबाकू सेवन से कैंसर, ब्लड प्रेशर, दमा, अंधापन, नपुंसकता, पाचन शक्ति कम होना, पित्ताशय विकृत होना, सिर दर्द, स्नायु दुर्बलता, आंखों की बीमारियां, चिड़चिड़ापन, दांतों के रोग, रक्त विकार आदि बीमारियां हो जाती हैं।
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