बारिश और आंधी से फसल में हुए नुकसान ने दो किसानों गांव सबली कटेली के जयराम और गांव मुड़िया कुर्मियात के श्यामाचरन की जान ले ली है। दोनों किसान भारी कर्जे में दबे हुए थे। परिवार के मुखिया की मौत से एक किसान की पत्नी और पांच बच्चे अनाथ हो गए तो दूसरे किसान के पिता की बुढ़ापे की लाठी टूट गई। एक तरफ केंद्रीय दल खेतों में पहुंचकर फसलों में हुई क्षति का जायजा लेता रहा, तो दूसरी ओर परिवार के लोगों के करुण क्रंदन के बीच किसानों की चिता को आग दी गई। एसडीएम लालबहादुर ने किसानों की मौत के बारे में जानकारी से इंकार किया है।
मामला एक
बेटी के हाथ पीले करने का सपना रहा अधूरा
पुवायां। पुवायां क्षेत्र के गांव सबली कटेली निवासी 38 वर्षीय जयराम पर गांव के कई लोगों का लगभग डेढ़ लाख रुपया कर्ज था। बड़ी बेटी 18 रूबी वर्ष की हो चली थी। उसके हाथ पीले करने की चिंता भी रोजाना चेहरे की झुर्रिया बढ़ा रही थी। इसके अलावा पत्नी रामगुनी, पुत्री 13 वर्ष की क्रांति, 10 वर्ष की सेंध्ुारी, सात वर्ष की रंजना और पुत्र तीन वर्षीय सुमित के पालन पोषण की जिम्मेदारी भी उन्ही के कंधों पर थी। मात्र चार बीघा खेत में खड़े गेहूं पर तमाम उम्मीदें टिकी थीं, फसल खराब हुई तो उसे गहरा धक्का लगा और अंतत: चिंता से बीमारी हुई और जान चली गई।
मूलरूप से पीलीभीत के बिलसंडा के गांव सिमरोली निवासी जयराम 15 वर्ष पूर्व सबली कटेली आकर रहने लगा था। वह मजदूरी कर परिवार की गुजर करता था। धीरे-धीरे उस पर गांव के कुछ लोगों का लगभग डेढ़ लाख रुपया कर्ज के रूप में चढ़ गया। पत्नी के अनुसार जयराम इस बार गेहूं की फसल बेचकर और जमीन को कुछ वर्ष के लिए गिरवी रखकर साहूकारों का थोड़ा कर्ज चुकाने और बड़ी बेटी की शादी की बात करते रहते थे। पति एक सप्ताह पूर्व खेती देखने सिमरौली गए थे। वापस आने पर वह बेहद निराश थे। बताया कि पूरी फसल नष्ट हो गई है। कर्ज और बेटी के हाथ पीले करने की चिंता से जयराम बीमार पड़ गए। बेहद तेज बुखार आदि होने के बाद भी रुपए नहीं होने के चलते आसपास के नीम हकीमों से इलाज कराया गया। मंगलवार को हालत ज्यादा बिगड़ी तो पत्नी से साहूकारों और रिश्तेदारों से रुपए लिए और पति को शाहजहांपुर ले गई, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही जयराम की मौत हो गई। मुखिया की मौत से घर में कोहराम मचा हुआ है।
मामला दो
इलाज के अभाव में श्यामाचरन की गई जान
पुवायां। पिता ननकाई पर आठ लाख रुपये से अधिक का कर्ज निपटाने की जिम्मेदारी से परेशान गांव मुड़िया कुर्मियात निवासी 50 वर्षीय श्यामाचरन को फसल खराब होने का ऐसा सदमा लगा कि उसकी जान ही चली गई। पुत्र की मौत से पिता ननकाई टूट से गए हैं। उनकी हालत विक्षिप्तों जैसी हो गई है।
ननकाई ने कई वर्ष पूर्व नाहिल की बैंक से चार लाख रुपया कर्ज लिया था। यह राशि अब बढ़कर छह लाख से ऊपर हो चुकी है। ननकाई के तीन बेटे थे, लेकिन श्यामाचरन पिता के साथ रहता था। कर्ज निपटाने के लिए उसने एक ट्रैक्टर लेने की सोंची। पिता पुत्र ने सलाह की थी कि ट्रैक्टर हो जाने से खेती ठेके पर लेकर और दूसरों के खेतों में जुताई, गहाई आदि कर मिलने वाले रुपयों से ट्रैक्टर की किस्त और पुराना कर्ज निपटा दिया जाएगा। लगभग चार लाख रुपए कर्ज पर ननकाई ने ट्रैक्टर निकाल लिया। इस वर्ष श्यामाचरन ने गांव के विनोद कुमार, कामता आदि की खेती ठेके पर ली थी और अपनी तीन एकड़ खेती में मसूर, गेहूं की फसल की थी। बारिश और आंधी में मसूर की एक एकड़ फसल पूरी तरह नष्ट हो गई और गेहूं की फसल को भी भारी नुकसान हुआ।
कर्ज के बढ़ते दबाव और फसल में नुकसान होने के सदमे से श्यामाचरन बीमार पड़ गया। उसे पेट दर्द की शिकायत थी। वह हर समय कर्ज चुकाने और लोगों का ठेका आदि देने की बात करते हुए रोने लगता था। ट्रैक्टर कि किस्त नहीं भर पाने की सूरत में ट्रैक्टर खिंच जाने की आशंका भी उसे परेशान किए थी। रुपए नहीं होने के कारण पिता उसका ठीक से इलाज नहीं करा पा रहे थे। मंगलवार शाम उसकी मौत हो गई। इससे घर में कोहराम मचा हुआ है।