मनोरंजन कर अधिकारी (ईटीओ) डीएस उपाध्याय के नेतृत्व में गठित टीमों ने मंगलवार को विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर करीब 90 लोगों को अवैध रूप से डाउनलोडिंग करते पकड़ लिया। टीम ने 150 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इनमें 90 दुकानदार लाइसेंस लिए बगैर चिप डाउनलोडिंग के धंधे में लिप्त पाए गए। ईटीओ ने लाइसेंस बनवाने को तीन दिन की मोहलत दी है।
शासन ने वित्त वर्ष 2010-11 से मोबाइल फोन और चिप डाउनलोड करने पर लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया है। विभागीय टीमों ने अभियान चलाकर शहर के कई इलाकों समेत पड़ोस के गांव नौगवां, सरैयां और पुवायां नगर में 150 दुकानें चेक कीं। इस कार्रवाई से दुकानदारों में हड़कंप मचा तो दंडात्मक कार्रवाई से बचने को कई दुकानदार शटर गिराकर भाग गए। हालांकि, ऐसी दुकानों को विभाग ने चिन्हित कर लिया है। अधिकारियों के अनुसार छापेमारी का अभियान 31 मार्च तक जारी रहेगा।
दस हजार जुर्माना, छह माह सजा का प्रावधान
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार उप्र मनोरंजन कर अधिनियम 1955 की धारा तीन के तहत सभी तरह की डाउनलोडिंग पर लाइसेंस लेना अनिवार्य है। लाइसेंस शुल्क शहरी क्षेत्र के लिए तीन हजार रुपये और ग्रामीण क्षेत्र केलिए 1500 रुपये निर्धारित है। लाइसेंस नहीं लेने पर अधिनियम की धारा आठ के तहत दस हजार रुपये जुर्माना देना पड़ेगा। जुर्माना अदा नहीं करने पर सीजेएम कोर्ट से छह माह के कारावास की सजा हो सकती है।
सिर्फ 20 फीसदी लोगों ने बनवाए लाइसेंस
‘जिले में डाउनलोडिंग करने वाले करीब एक हजार प्रतिष्ठान हैं, लेकिन लाइसेंस बमुश्किल 200 लोगों ने बनवाए हैं। निरीक्षण में जिस दुकान पर लैपटॉप रखा मिलेगा, वहां केदुकानदार को डाउनलोडिंग के धंधे में लिप्त मानते हुए कार्रवाई की जाएगी। जिन दुकानदारों ने पहले से लाइसेंस बनवा रखे हैं, वे तत्काल नवीनीकरण कराएं।’
- डीएस उपाध्याय, जिला मनोरंजन कर अधिकारी