अधिकारियों के आदेश की अवहेलना करके अन्य कर्मचारियों को काम करने से रोककर अफसरों के खिलाफ भड़काने के मामले में उत्तर रेलवे के सहायक मंडल अभियंता द्वारा ट्रैकमैन सुनील तिवारी को दिया गया आरोप पत्र प्रवर मंडल अभियंता ने खारिज कर दिया है। रेलकर्मियों को इस प्रकरण में विभागीय यूनियनों के आपसी स्वार्थ टकराव की बू आ रही है।
स्थानीय स्टेशन पर तैनात सीनियर सेक्शन आफीसर लालजी मौर्य ने चालू माह के पहले सप्ताह में सहायक मंडल अभियंता केके शर्मा को ट्रैकमैन तिवारी के खिलाफ लिखित रिपोर्ट सार्थक कार्यवाही की अपेक्षा के साथ भेजी थी। एसएसई मौर्य ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि गत दो अप्रैल को ट्रैकमैन ने स्टोर में कार्यरत महिला कर्मचारी का तैनाती स्थान बदलने पर कार्यालय के एक लिपिक के बहकावे में आकर अन्य कर्मचारियों को ड्यूटी करने से रोक दिया।
अपनी रिपोर्ट के साथ एसएसई मौर्य ने सहायक मंडल अभियंता को गैंग में कार्यरत शिवकुमार, धर्मेंद्र कुमार, रामेश्वर, रामचंद्र, मुन्नू सिंह, रतन देवी, रमेश चंद्र, राजीव कुमार के हस्ताक्षर और अंगूठा निशान से जारी संयुक्त लिखित बयान भी संलग्न किया। इसमें कर्मचारियों ने स्वीकार किया कि ट्रैकमैन ने काम पर जाने से रोका और ड्यूटी करने पर उच्चाधिकारियों से मिलकर देहरादून तबादला कराने की धमकी दी।
मामले को गंभीरता से लेते हुए सहायक मंडल अभियंता ने ट्रैकमैन को आरोप पर जारी कर जवाब देने को कहा, लेकिन उन्हें जवाब मिलने से पहले मुरादाबाद के सीनियर डीईएन ने उसे खारिज कर दिया। इस पूरे प्रकरण को रेलवे के कई अधिकारी व कर्मचारी यूनियनों के आपसी टकराव का नतीजा मान रहे हैं। रेलसूत्रों के अनुसार इसलिए अनुशासनहीनता के गंभीर मामले को दबाने के लिए आरोप पत्र रद्द कर दिया गया। एडीईएन शर्मा ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि चार्ज शीट डीईएन के स्तर से रद्द हुई है।