गांव बिलहरी निवासी नरेश पाल की मौत के बाद खौफ के साए में जी रहा नरेश पाल व उसके भाई दयाराम का परिवार आखिरकार अपने घर की दहलीज छोड़कर गांव से पलायन करने पर विवश हो गया। रविवार को लगभग शाम साढ़े छह बजे अपना सारा सामान, जानवर, ट्रैक्टर-ट्रॉली पर लादकर गांव से चला गया। गांव छोड़ते समय दोनों परिवारों की आंखों में दबंगों का खौफ और आंसू साफ दिख रहे थे। साथ ही पैतृक घर और गांव को छोड़ने का दुख भी नजर आ रहा था। पुलिस से सुरक्षा न मिलने और दबंगों के द्वारा बार-बार धमकाए जाने पर उन लोगों ने जान बचाने के लिए गांव छोड़ने में ही भलाई समझी।
दो माह पूर्व छेड़छाड़ के विरोध पर हुआ था विवाद
18 मई 2015 को गांव के ही अल्ताफ पुत्र इंम्तियाज द्वारा मृतक नरेश पाल की पुत्री से छेड़छाड़ का विरोध करने पर नरेश पाल का अल्ताफ से विवाद हुआ था। बाद में घर में घुसकर मारपीट करने पर जब गांव के लोग इक_े होकर कोतवाली पहुंचे और काफी हंगामा करने के बाद पुलिस ने अल्ताफ व इम्तियाज के खिलाफ मारपीट व छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज कर अल्ताफ को जेल भेज दिया था। तब से ही आरोपी पक्ष के लोग उससे रंजिश मानने लगे थे और आये दिन मुकदमा वापस लेने को दबाव बनाते थे तथा जान से मारने की धमकी भी देते थे।
एक पखवाड़े तक गांव में तैनात रहा था पुलिस बल
उक्त प्रकरण दो समुदायों के बीच होने के कारण कुछ शरारती तत्वों ने इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की थी। जिसके चलते लगभग एक पखवाड़े तक गांव में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा था और तत्कालीन एसडीएम वंदना त्रिवेदी व सीओ विजय शंकर मिश्रा ने गांव पहुंचकर पीड़ित को सुरक्षा का आश्वासन दिया था।
संदिग्ध हालत में मिला था नरेश पाल का शव
विगत 18 जुलाई को नरेश पाल का शव संदिग्ध अवस्था में गांव के किनारे पापुलर के पेड़ पर लटका मिला था। जिस पर परिजनों ने चार लोगों के खिलाफ पुलिस को तहरीर देकर नरेश पाल की हत्या कर शव पेड़ पर लटकाने का आरोप लगाया था। किंतु पुलिस ने न तो उसकी तहरीर ली और न ही पीड़ित पक्ष की बात सुनी और नरेश पाल की मौत को आत्महत्या बता कर मामले को ठंडे वस्ते मेें डाल दिया। इतना ही नहीं मृतक के भाई दयाराम पर आधा दर्जन सादा कागजों पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया। इंकार करने पर पीएम की रिपोर्ट भी देने से मना कर दिया।
भईया तौ मारै डारो, हमउ मार डलियैं
अमर उजाला टीम के सामने रोते हुये मृतक नरेशपाल के भाई दयाराम ने कहा- हमारे भईया कौ तौ मारीयै डारो, हियां रहे तौ हमौं कौ मार डरियैं गांव भरे को एकौ बच्चा तक हमैं तसल्ली देन नाय आओ। दयाराम ने बताया कि कई बार पुलिस व प्रशासन को सूचना देने के बाद भी उसे बराबर धमकियां मिल रहीं हैं। इसलिये उसने गांव छोडने का फैसला किया है।
पुलिस व प्रशासन ने नहीं की सुनवाई
मृतक नरेश पाल की पत्नी मीरावती का कहना है कि उसे व उसके परिवार को घटना के बाद से ही जान से मारने की धमकियां मिल रहीं थी कई बार पुलिस व अफसरों को भी बताया गया मगर किसी ने एक न सुनी जिसका परिणाम उसे अपने पति को खोकर भुगतना पड़ा अब वह और खतरा उठाकर अपने घरवालों को नहीं खोना चाहती।
सपा सरकार में कोई भी सुरक्षित नहीं है। बिलहरी गांव में दबंगों ने गरीब परिवार को पलायन करने पर मजबूर कर दिया। इन लोगों को लेकर एसपी से मुलाकात करेंगे, जिससे कि इन्हें न्याय मिल सके।
- रोशनलाल वर्मा, बसपा विधायक