पुवायां के गांव अगौना बुजुर्ग में संपत्ति विवाद में बहू को जिंदा जलाकर मार डालने के मामले की सुनवाई पूरी करते हुए शुक्रवार को अपर सत्र न्यायाधीश ने उसकी सास, ससुर, जेठ, जेठानी और देवर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही पांचों पर छह-छह हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। घटना 19 मई 2012 की रात साढ़े नौ बजे हुई थी और 28 मई 2012 को उपचार के दौरान जली हुई विवाहिता ने दम तोड़ दिया था एवं 30 मई 2012 को उसके पिता की तहरीर के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी।
पुवायां के पुुवई निवासी हरिओम मिश्रा की ओर से दर्ज एफआईआर के अनुसार, उनकी बेटी नीतू की शादी घटना से 10 साल पहले अगौना बुजुर्ग निवासी देव सरन के बेटे अशोक कुमार से हुई थी। बेटी और दामाद की दो संतानें तीन और पांच वर्ष के उम्र की तब थीं। ससुराल में बाद में नीतू और उसके पति एवं बच्चों को संपत्ति में कोई हिस्सा दिए बिना ही अलग कर दिया गया था। घटना से दो माह पहले भी नीतू की ससुराल वालों ने पिटाई की थी, तब मामले की एनसीआर भी पुलिस के यहां दर्ज हुई थी। बकौल हरिओम मिश्रा, 19 मई 2012 को दामाद जरूरी काम से बाहर गया था और उनका बेटा रोहित वहां पहुंचा हुआ था। तभी रात के साढ़े नौ बजे ससुराल के दूसरे सदस्यों ने उनकी बेटी को बेदखल करने और अन्य ताने देने शुरू कर दिए। उसी पर कहासुनी शुरू हुई तो ससुर देव सरन, सास मांडवी और जेठानी सुनीता ने नीतू को पकड़ लिया एवं जेठ सुभाष ने उसके ऊपर डीजल उड़ेल दिया और देवर गौतम ने माचिस से आग लगा दी। रोहित ने अपनी बहन को बचाने का प्रयास किया तो उसे भी मारा-पीटा गया।
रोहित ने घर पहुंचकर सूचना दी तो हरिओम अपनी पत्नी के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे तो बेटी को जली हुई हालत में आंगन में पड़ा हुआ पाया। उन्होंने तुरंत अपनी बेटी को जिला अस्पताल पहुंचाया जहां घटना के संबंध में उसके बयान भी दर्ज हुए। हालत बिगड़ने पर नीतू को एक निजी नर्सिंग होम में भरती कराया गया, जहां उसने 28 मई 2012 को दम तोड़ दिया। घटना की तिथि से बेटी के इलाज और देखभाल में व्यस्तता के कारण 30 मई 2012 को एफआईआर दर्ज कराई गई। अपर सत्र न्यायाधीश विजय कुमार डुंगराकोटी ने सभी पक्षों, गवानों, बचाव पक्ष के वकील और सरकारी वकील वंशीलाल के तर्कों को सुनने के बाद पांचों आरोपियों को दोषी पाया और सजा सुनाई।