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जिले में नहीं थम रही बाल यौन हिंसा

Thu, 01 Jan 2015 11:53 PM IST
मनोज कृष्ण मिश्र, शाहजहांपुर
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जिले में बाल यौन हिंसा का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है, पाक्सो की अदालत में हर महीने औसतन 15 मामले आ रहे हैं। बीती 2012 में 16 दिसंबर को हुए दामिनी कांड के बाद भले ही यह कानून सख्त बन गया हो, मगर आंकड़े कहते हैं कि बच्चे अब भी सुरक्षित नहीं हैं। यानी सख्त कानून से भी बाल यौन हिंसा थम नहीं रही। इस सबके पीछे कानून के जानकारों का कहना कि छोटे बच्चों को देखकर किसी के मन वात्सल्य के बजाय वासना भरना भी एक कारण है, जोकि साइक्लो डिसऑडर के रोगी होते हैं।
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अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत में पॉक्सो (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल अफेंसेज एक्ट-2012) के मामलों की सुनवाई होती है। इस अदालत में नवंबर में पॉक्सो के मामले पहुंचे हैं, उनमें पुवायां के सुभाष और मिथिलेश, थाना जैतीपुर के मोहन व हरिराम, निगोही के आकाश, थाना रामचंद्र मिशन के सत्तार खां और इंद्रकुमार, खुदागंज के सुरजीत, कांट के सुरेश कश्यप, बंडा के राजेंद्र और मोनू, थाना रोजा के अजय यादव के खिलाफ दर्ज मामले शामिल हैं। इनमें से सुरजीत व टिल्लू के खिलाफ आया मामला सबसे खास है, उन पर खुदागंज के गांव पहाड़ीपुर भोपत में नाबालिग से दुष्कर्म में नाकाम रहने पर लड़की पर मिट्टी का तेल डालकर उसे जलाने का आरोप है। बाद में नाबालिग की मृत्यु हो गई थी। इसी तरह जिले में अक्तूबर माह में भी लगभग इतने ही मामले दर्ज हुए थे। इन सभी मामलों के कम से कम एक अभियुक्त गिरफ्तार हो चुके हैं, तभी ये मामले कोर्ट में दर्ज हुए।
जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष पूनम सक्सेना कहती हैं कि छोटे बच्चों को वासना की निगाह से देखने वाला मनोवैज्ञानिक रोगी होता है। उन्होंने बताया कि एक मामला छह साल की बच्ची से रेप का उनके पास आया था, जिसमें पुलिस रिपोर्ट तक दर्ज नहीं कर रही थी। जब वह एसपी से मिलीं तब रिपोर्ट दर्ज हो पाई। इनका मानना है कि जिले में बाल यौन हिंसा का ग्राफ बढ़ रहा है। बहुत से मामले दबा दिए जाते हैं। इस बात का समर्थन समिति की सदस्य नम्रता धवन भी करती हैं। इनका मानना है कि कानूनी प्रक्रिया सरल हो। मामले का निस्तारण शीघ्र हो, इसके साथ ही बच्चों को अच्छे-बुरे स्पर्श की जानकारी भी दी जाए तथा स्कूलों में कानून की सामान्य जानकारी भी दी जाए, तो इस पर कंट्रोल हो सकता है।
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यह है पाक्सो कानून
18 साल से कम आयु के लड़के या लड़की केयौन उत्पीड़न के मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज होता है। इस एक्ट की धारा तीन लैंगिक हमला के लिए है, जिसमें सात वर्ष से उम्रकैद तक की सजा व जुर्माना हो सकता है। धारा-6 में कम से कम 10 साल से उम्रकैद व जुर्माना। धारा-8 लैंगिक आशय से अंगों का स्पर्श करना, जिसमें तीन से पांच वर्ष का कारावास व जुर्माना। धारा-11 लैंगिक उत्पीड़न की है, जिसमें अश्लील इशारे करना, अश्लील साहित्य दिखाना या पढ़ाना, ब्लैकमेल करना आता है, इसके तहत तीन वर्ष कैद व जुर्माना की सजा है।

नहीं हो रहा नियमों का पालन
नियम है कि पीड़िता का बयान दर्ज करने के लिए सब इंस्पेक्टर रैंक की महिला कर्मचारी होना चाहिए और बच्ची-किशोरी का पसंदीदा स्थान पर जाकर बयान दर्ज करना होगा। इस दौरान वह सादी वर्दी में होनी चाहिए तथा अभिभावक की भांति व्यवहार करना जरुरी है। वहीं मुल्जिम द्वारा इस दौरान किसी तरह पीड़िता को प्रभावित नहीं होने देना है। वहीं इन सब नियमों का पुलिस उल्लंघन कर रही है।
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2014 में अदालत में पहुंचे मामले
सितंबर - छह मामले
अक्तूबर - आठ मामले
नवंबर- 15 मामले
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