नगर के मोहल्ला बहादुर गंज निवासी एक युवती को अपहृत कर गायब कर देने के मामले में पुलिस की रिपोर्ट पर न्यायालय द्वारा ग्राम बिलहरा निवासी अभिषेक शर्मा को निर्दोष माना। बाद में न्यायिक आदेश पर युवक को जेल से रिहा कर दिया गया।
गत वर्ष 19 नवंबर को रामचंद्र पुत्र लल्लू निवासी बहादुरगंज ने बिलहरा निवासी अभिषेक शर्मा व उसकी बुआ को आरोपित करते हुये अपनी बेटी आरती के अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। इस पर काफी दिनों तक जद्दोजहद के बाद पुलिस किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी। विवेचक अनुज तिवारी की जांच से संतुष्ट न होने पर आरती के परिजनों की शिकायत पर विवेचक बदलकर रामबरन यादव को जांच सौंपी गई। अधिकारियों के दबाव में पुलिस ने बीती एक मार्च को अभिषेक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
उसके घरवालों द्वारा लाख समझाने के बावजूद पुलिस ने एक न सुनी। इसी बीच अभिषेक की तय हो चुकी शादी तो टूट ही गई, साथ ही ग्राम बिलहरा में प्राथमिक विद्यालय में प्रेरक की नौकरी भी छूट गई। इससे अभिषेक का परिवार गहरे सदमे में आ गया। परिजनों द्वारा तहसील दिवस, थाना दिवस व डीएम, आईजी, डीआईजी सबकी चौखट पर गुहार लगाने के बाद जब कहीं नहीं सुनी गई तो अभिषेक की सगी बहनों सीमा और रोशनी ने अफसरों को आत्मदाह का नोटिस दिया और न्याय पाने को बीती 17 मार्च को कांशीराम कालोनी में पानी के टैंक पर जा चढ़ीं थीं। अधिकारियों ने लगभग तीन घंटे तक मान मनौव्वल की और कोतवाल द्वारा एक हफ्ते में भाई की रिहाई का लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही दोनों बहनें टंकी से नीचे उतरीं।
‘न्याय की इस लड़ाई में हमारा साथ देने वाले शुभचिंतकों को इस जीत का श्रेय जाता है। मैं इस लड़ाई में सहयोग देने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त करती हूं।’
- रोशनी शर्मा, अभिषेक की बहन
घरवालों से प्रताड़ित होकर घर से गई थी आरती
‘आरती घर वालों की मारपीट और प्रताड़ना से तंग आकर घर से गई थी। मोबाइल पर सोनभद्र जनपद के राबर्ट्सगंज निवासी अल्ताफ पुत्र अल्लाह खान से उसके चार माह पूर्व हुये संपर्क के बाद अपनी मर्जी से 19 नवंबर को लखनऊ गई और वहां से अल्ताफ के साथ उसके घर जा कर परिजनों की सहमति से शादी करने के बाद दावत और सारी रस्में कीं। मंगलवार को सुबह छह बजे भक्सी तिराहे पर पुलिस ने आरती को उस वक्त बरामद कर लिया, जब वह बैंक से पैसा निकालने जा रही थी। बाद में अल्ताफ को भी पुलिस ने दबोच लिया। एसीजेएम प्रथम के न्यायालय में पेश करने पर न्यायालय ने दोनों को बालिग व विवाहित मान कर स्वतंत्र कर दिया। इसके बाद दोनों सोनभद्र रवाना हो गए।’
- रूम सिंह यादव, कोतवाल