आरपीएफ चौकी के सामने अपयार्ड में मक्के से भरी खड़ी मालगाड़ी के एक डिब्बे की सील तोड़कर चोरों ने दर्जनों बोरा मक्का चुरा लिया। चोरों को जब पास की मठिया कालोनी के लोगों ने टोका तो दहशत फैलाने के लिए फायरिंग कर दी। इस दौरान के आरपीएफ के जवान मूकदर्शक बने रहे।
यह वाक्या शुक्रवार की रात करीब तीन बजे का है जब सीतापुर ब्रांच लाइन की ओर से जगाधरी, पंजाब जाने के लिए एक मालगाड़ी को रोजा अपयार्ड की लाइन संख्या सात पर रोका गया था। इस मालगाड़ी के डिब्बों में मक्का लदा था। यह मालगाड़ी शाम करीब साढ़े सात बजे रोजा अप यार्ड में आई थी और तकनीकी कारणों से रात भर इसे अपयार्ड में ही रोका गया था।
मठिया कॉलोनी के बाशिंदों ने पुलिस को बताया कि करीब आधा दर्जन चोरों ने मालगाड़ी के एक डिब्बे की सील तोड़ दी और उसमें रखे मक्का के बोरों को उतारने लगे। जब चोर मठिया कॉलोनी से बोरे लेकर गुजर रहे थे, तभी मोहल्ले के लोगों ने उन्हें टोक दिया। इससे चोरों ने फायरिंग कर दहशत फैला दी।
सूचना पर आरपीएफ के दो जवान मौके पर गए और सील टूटे डिब्बों को देखकर लौट गए। चर्चा है कि मौके से आरपीएफ के जवानों ने दो लोगों को मय बोरों के हिरासत में लिया था, लेकिन सब कुछ मैनेज होने के बाद उनको छोड़ दिया गया। गौरतलब है कि इन दिनों रोजा के अपयार्ड, सीतापुर ब्रांच को जाने वाले टर्निग प्वाइंट और हथौड़ा गांव के समीप रेल के डिब्बों की सील तोड़कर चोरी की घटनाएं आम हो गईं हैं। इसके लिए आरपीएफ संजीदा नहीं दिखती। रेल संपत्ति की सुरक्षा के मामले में आरपीएफ की कार्यप्रणाली पर भी अब प्रश्न चिन्ह लग रहे हैं।
शुक्रवार की शाम को एक मालगाड़ी बिहार की ओर से आई थी। इसमें मक्का लदा था, जिसे पंजाब के जगाधरी जाना था तकनीकी कारणों से इसे रात में अपयार्ड में ही रोका गया था। घटना के संबंध में हमें कोई जानकारी नहीं है।
- मुशर्रत उल्ला, स्टेशन अधीक्षक, रोजा
रोजा अपयार्ड में मालगाड़ी से चोरी की किसी भी प्रकार की सूचना हमारे पास नहीं है। न ही रोजा आरपीएफ के लोगों ने कोई बात बताई है, फिर भी हम घटना की जांच करेंगे।
- सुरेंद्र प्रताप सिंह, प्रभारी निरीक्षक आरपीएफ
राम प्रसाद बिस्मिल नगर से फिर शुुरू हुआ कोयले का कारोबार
राम प्रसाद बिस्मिल नगर रेलवे स्टेशन से तीन माह बाद कोयले का अवैध कारोबार फिर से शुुरू हो गया है। बता दें कि तीन माह पहले आरपीएफ में 40 टन कोयला बरामद किया था, जो आरपीएफ थाने पहुंचते पहुंचते मात्र चार क्विंटल ही रह गया था। इस मामले में आरपीएफ के उच्चाधिकारियों ने यहां के एसआई और एएसआई को हटा दिया था, तब से यहां किसी थानेदार की स्थाई नियुक्ति नहीं हुई है, तब से यह कारोबार मंद सा पड़ा हुआ था। धीरे-धीरे सुस्त पड़े कोयला कारोबारियों ने अपने पैर फिर से जमा लिए। महोलिया, सिउरा, बिलंदापुर के कई गैंग के लोग कोयले के काले कारोबार में शरीक हो गए फर्क सिर्फ इतना है कि अब सबकुछ आरपीएफ की जानकारी होने के बाद हो रहा है। यही कारण है कि मुख्य आरोपियों की साठगांठ के चलते आरपीएफ गिरफ्तार करने से कतरा रही है।