सात साल पहले निगोही कस्बे में शाम के समय अवैध संबंधों का विरोध करने वाले युवक पर दूसरे पक्ष के चार लोगों ने धावा बोल दिया था। सरेआम उसे मारते - पीटते हुए उस पर गोलियां बरसा दी गईं। मौके पर घायल की मौत हो गई। उस मामले की सुनवाई बृहस्पतिवार को पूरी करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश शाहिद रजा ने निगोही के ही रहने वाले निर्लय जायसवाल, किन्नू और मनीराम को दोषीसिद्ध अभियुक्त करार दिया। चौथे आरोपी का केस किशोर न्यायालय रेफर कर दिया गया। दोषीसिद्ध अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए न्यायाधीश ने तीनों पर 20 - 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। घटना 22 जुलाई 2009 की शाम को हुई। अमित कुमार गुप्ता पुत्र जगदीश गुप्ता किसी काम से घर से बाहर निकला तो कुछ युवकों ने घेर लिया और कहा कि ज्यादा बोलता है, इसे मार दो। घेरने वालों में पिस्टल लिए निर्लय जायसवाल, रायफल लिए नरेंद्र जायसवाल, तमंचा लिए किन्नू और मनी जायसवाल थे। लोग अभी कुछ समझ पाते तब तक निर्लय ने अपने पिस्टल से ताबड़तोड़ चार गोलियां अमित के सीने पर दाग दीं। फायरिंग की आवाज सुनकर गली में संतोष नामक युवक मौके पर पहुंचा तो नरेंद्र ने उसके सीने पर रायफल तान दी लेकिन संतोष ने रायफल की नाल जैसे - तैसे ऊपर की ओर कर दी जिससे फायर उसे नहीं लगा। इतने में गली से अन्य लोगों के मौके की ओर लपकने पर चारों हमलावर भाग निकले। अमित को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसके पिता की तहरीर के आधार पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 302 में प्राथमिकी दर्ज कर ली। मुकदमे की सुनवाई और पुलिस को दिए बयान में मृतक के भाई अनूप गुप्ता ने बताया निर्लय मृतक का दोस्त था और उसके घर आया - जाया करता था। उसी क्रम में निर्लय का अमित की पत्नी मंजू से अवैध संबंध हो गया था और उसका विरोध करने पर अमित की हत्या की गई। सरकारी वकील सुनील कुमार सिंह की ओर से प्रस्तुत गवाहों और उनके द्वारा घटनाक्रम के संबंध में दिए गए तर्क, पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और प्रामाणिक ब्योरों के अलावा बचाव पक्ष का तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने बृहस्पतिवार को मामले की सुनवाई पूरी करते हुए अपना फैसला सुनाया।
हत्या के मामले में एक को उम्रकैद
जलालाबाद थाना क्षेत्र के गांव मनोरथपुर में 22 अगस्त 2011 की शाम सात बजे अपनी बैठक पर बैठे पुष्पेंद्र से क्षेत्र के सुरेंद्र पाल सिंह ने झगड़ा किया और उसी क्रम में उसने तमंचे से फायर कर दिया। फायरिंग की आवाज सुनकर गांव के अन्य लोग मौके की ओर लपके तो हमलावर भाग निकला और घायल को अस्पताल में भरती कराते हुए घायल के पिता देशराज ने पुलिस को तहरीर थी। उसके आधार पर आईपीसी की धारा 304 में केस दर्ज कर लिया गया लेकिन उपचार के दौरान पुष्पेंद्र की मौत हो जाने पर केस को आईपीसी की धारा 302 में तरमीम कर दिया गया। पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया और कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। सरकारी वकील नत्थू लाल वर्मा ने नौ गवाहों को प्रस्तुत किया। सभी पक्षों के तर्क को सुनने और साक्ष्यों के अवलोकन के बाद विशेष न्यायाधीश विजय कुमार डुंगराकोटी ने बृहस्पतिवार को मुख्य आरोपी सुरेंद्र पाल सिंह उर्फ भोले को दोषीसिद्ध अभियुक्त करार दिया। उसे उम्र कैद की सजा सुनाई और 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।