विशेष कोर्ट ने 40 हजार रुपये जुर्माना लगाया, आरोपी का भाई बरी
शहर के आरसी मिशन थाना क्षेत्र से दिनदहाड़े़ 13 वर्षीया बच्ची को अगवा कर हरदोई ले जाने और वहां दुराचार करने के मामले में शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश विजय कुमार डुंगराकोटी ने दो आरोपी भाइयों में से एक को दोषी पाकर सात साल की सजा सुनाई। दूसरे आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।
आरसी मिशन थाने में 13 मई 2013 को पीड़ित किशोरी के पिता ने तहरीर दी कि उनकी 13 वर्षीय बच्ची को 12 मई 2013 की अपराह्न तीन बजे हरदोई के पिहानी थाना क्षेत्र के सरावर गांव का ट्रक क्लीनर अनिल शुक्ला अपने भाई विनोद की मदद से अगवा कर ले गया। बच्ची को ले जाते हुए दोनों भाइयों को क्षेत्र के कई लोगों ने देखा।
तहरीर के आधार पर पुलिस ने नामजद केस दर्ज कर किशोरी की तलाश शुरू की तो वह 14 मई 2013 को हरदोई में मिली। आरोपी युवकों ने अपने खिलाफ दर्ज केस को झूठा और रंजिशन बताया और कहा कि लड़की अपनी मर्जी से उनके घर आई। पुलिस ने किशोरी का मेडिकल कराया और साक्ष्यों को जुटाया। बाद में पुलिस की ओर से कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई।
सरकारी वकील नत्थूलाल वर्मा की ओर से प्रस्तुत सात गवाहों के बयान, पुलिस द्वारा प्रस्तुत चिकित्सकीय साक्ष्य व दस्तावेजों का अवलोकन करने एवं बचाव पक्ष के दलीलों को सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश विजय कुमार डुंगराकोटी ने आरोपी विनोद को बरी कर दिया और अनिल को दोषी पाते हुए उसे आईपीसी की धारा 363, 366, 368 और 376 के साथ ही 3/4 पॉक्सो एक्ट में सात साल के कारावास की सजा सुनाई। उस पर 40 हजार रुपये का जुर्माना भी किया। निर्देश दिया कि जुर्माना की राशि में से 30 हजार रुपये पीड़िता को बतौर प्रतिकर अदा किया जाए।