फास्ट ट्रैक कोर्ट की अपर सत्र न्यायाधीश मोनिका ठाकुर ने करीब 19 साल से भी कुछ अधिक पुराने हत्याकांड के मामले में शुक्रवार को सुनवाई पूरी करते हुए मुख्य आरोपी कमलेश धानुक को दोषीसिद्ध अभियुक्त करार देकर उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही उस पर 30 हजार रुपये जुर्माना लगाया। वसूली जाने वाली जुर्माना राशि 30 हजार रुपये मृतक की पत्नी को बतौर प्रतिकर भुगतान करने का आदेश दिया। जुर्माना अदा न करने की सूरत में अभियुक्त को एक वर्ष अतिरिक्त कैद की सजा का निर्देश दिया।
घटना पुवायां थाना क्षेत्र के कलंदरगंज में सात जून 1997 को तड़के पौ फटने से पहले तीन बजे हुई थी। रोजाना की भांति रामपाल अपने कमरे में सोया था और उसका भाई कामता बाहर बरामदे में सोया हुआ था जबकि दूसरा भाई टीकाराम अपने कमरे में सोया था। मकान में तड़के करीब तीन बजे आहट हुई तो परिवार वाले जगे तो देखा गांव के ही कमलेश धानुक व विमलेश धानुक मकान के भीतर तमंचा लेकर घुसे हैं और जमीन खरीदने का मजा चखाने की बात कहते हुए पलक झपकते ही रामपाल पर फायर झोंक दिया। परिवार के लोग जबतक दोनों की ओर लपकते, दोनों हमलावर तमंचा लहराते हुए गांव की ओर भाग निकले। पुलिस को दी गई तहरीर में टीकाराम ने बताया कि घटना से करीब आठ माह पहले उसके परिवारवालों ने कमलेश व विमलेश के भाई फकीरे लाल उर्फ फक्कड़ की जमीन खरीदी थी और तभी से वे सब इस परिवार से रंजिश रखने लगे थे। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर कर शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद मामले की पड़ताल पूरी अपनी चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी। पहले मामला सीजेएम कोर्ट में गया और वहां से सत्र न्यायालय के सुपुर्द किया और कुछ समय पहले प्रकरण को फास्ट ट्रैक कोर्ट को सौंप दिया गया। पीड़ित पक्ष की ओर से एडीजीसी क्राइम मनोज कुमार मुनी ने गवाहों के बयान कराए और आरोपी के अपराध संबंधी अपने तर्क प्रस्तुत किए। शुक्रवार को गवाहों के बयान, पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य और तथ्यों का अवलोकन करने के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश ने अपना फैसला सुनाया।