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शिक्षामित्र ने फांसी लगाकर की खुदकुशी

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शिक्षामित्र ने फांसी लगाकर की खुदकुशी

समायोजन रद्द होने व संपत्ति में हिस्सा नहीं मिलने से तनाव में थे
परिजनों ने नहीं कराया पोस्टमार्टम

अमर उजाला ब्यूरो
मदनापुर। गांव फिरोजपुर डूडा निवासी 45 वर्षीय शिक्षामित्र राजवीर ने मंगलवार सुबह छह बजे फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। 17 वर्षीय बड़ी बेटी कमरे में झाडू लगाने गई तब घरवालों को जानकारी हुई। उनका शव मफलर के सहारे पंखे के कुंडे में लटक रहा था। परिजनों ने उनके जीवित होने की आस में उन्हें फंदे से उतारकर जिला अस्पताल भी लेकर गए लेकिन वहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया और पंचनामा भराने के बाद शव ले गए।
शिक्षामित्र राजवीर सिंह लश्करपुर ग्राम पंचायत के मजरा मुजफ्फरपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय में शिक्षामित्र थे। समायोजन रद्द हो जाने के बाद वह चालीस हजार से मात्र दस हजार के मानदेय पर आ गए थे। इस वजह से थोड़ा तनाव में रहते थे। वहीं परिवार के लोगों से भी संपत्ति बंटवारे को लेकर मनमुटाव था। इससे उनका मानसिक तनाव कुछ और बढ़ गया था। पिता महिपाल सिंह नायब तहसीलदार पद से रिटायर हुए हैं। वह राजवीर से छोटे दो भाइयों राकेश और देवेश को ज्यादा मानते हैं। बताते हैं कि पिता राजवीर को थोड़ कम मानते थे और उसे हिस्सा देने के पक्ष में नहीं थे क्योंकि राजवीर के तीन बेटियां निगम (17), पूनम (15), अंजलि (12) हैं। संपत्ति बंटवारे को लेकर तीन माह पहले घर में रिश्तेदारों के बीच बात भी हुई थी लेकिन कोई हल नहीं निकला। इसी वजह से वह तनाव में रहते थे। मंगलवार सुबह पत्नी अनीता शौच को चली गईं और बेटियां घरेलू काम में जुट गईं। इसी बीच सुबह छह बजे राजवीर छत पर बने कमरे में गए और मफलर से गले में फंदा कसकर पंखे के कुंडे में लटक गए। लगभग आधा घंटे बाद बड़ी बेटी ऊपर कमरे में झाडृू लगाने गई तो पिता को फांसी के फंदे पर झूलते देख उसकी चीख निकल गई। इसके बाद परिवार व गांव के लोग छत पर पहुंचे और फंदे से उतार कर जिंदा होने की उम्मीद जिला अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टर ने राजवीर सिंह को मृत घोषित कर दिया।
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गले में निशान मिले हैं। इससे अनुमान है कि गला कस जाने से उनकी मौत हुई है। परिवार के लोग पोस्टमार्टम नहीं कराना चाह रहे थे।
राजवीर सिंह, थानाध्यक्ष, मदनापुर
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सुबह सूचना मिली थी कि पारिवारिक कलह में शिक्षामित्र ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। परिवार के लोग पोस्टमार्टम नहीं कराना चाह रहे थे, इसलिए पंचनामा भरकर शव परिजनों को सौंप दिया गया। अरुण चंद्र, सीओ सदर
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