शाहजहांपुर। चंडीगढ़ में बापू धाम कॉलोनी में सेक्टर-26 में रहने वाले लालाराम सक्सेना को शक है कि शाहजहांपुर में रहने वाले कुछ रिश्तेदारों ने उनके बेटे को गायब कर दिया है। वह बेटे की तलाश में भटक रहे हैं। उन्हें अभी भी उम्मीद हैं उनका बेटा शाहजहांपुर जिले में ही है और वह इसी उम्मीद में शाहजहांपुर आते हैं और फिर से मायूस होकर लौट जाते हैं, लेकिन उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी है। दस माह बीत जाने के बाद भी बेटे का सुराग नहीं लगने पर पुलिस से उनका भरोसा उठता जा रहा है।
ओसीएफ से रिटायर 78 वर्षीय लालाराम सक्सेना ने बताया कि वह परिवार के साथ आठ सितंबर 2016 को शाहजहांपुर में मोहल्ला बाडूजई प्रथम में रहने वाले अपने साढू़ भोलानाथ के घर आए थे, यहीं से उनका बेटा शिव शंकर उर्फ पप्पू लापता हो गया। मामले की गुमशुदगी सदर बाजार थाने में दर्ज कराई, लेकिन पुलिस आज तक उनके बेटे को तलाश नहीं पाई। लालाराम ने बताया कि लापता होने के कुछ दिन बाद पता चला कि बेटा खुटार में दिवाकर के यहां है, वह खुटार भी तलाश करने गए, लेकिन वहां यह तो पता चला कि कुछ दिन यहां रहा, लेकिन यहां से भी वह चला गया। उन्होंने बेटे को लखीमपुर खीरी, पलिया, मैलानी में भी तलाश किया, लेकिन कुछ भी पता नहीं चला। लालाराम ने बताया कि चार बेटों में सबसे छोटा शिवशंकर शादीशुदा है, उसके दो बेटियां और एक बेटा भी है। बेटे की ससुराल भी शाहजहांपुर में है। उसे शक है कि शाहजहांपुर में रहने वाले कुछ रिश्तेदारों ने उसके बेटे को गायब कर दिया है। उसके न मिलने से घर वाले परेशान हैं। पुलिस से उसका भरोसा उठता जा रहा है कि वह उसके बेटे को तलाश भी कर पाएगी, लेकिन उसने अपनी खुद की उम्मीद नहीं छोड़ी है और इसी उम्मीद में वह शाहजहांपुर आकर बेटे की तलाश करते रहते हैं। उन्हें उम्मीद है कि बेटा यहीं कहीं होगा। मां कलावती की आंखें बेटे की राह देखते-देखते पथरा गईं हैं। बता दें कि लालाराम मूल रूप से पीलीभीत के ललौरीखेड़ा हरसुईया के रहने वाले हैं। ओसीएफ में कर्मचारी रहते उनका स्थानांतरण चंडीगढ़ हो गया, वहां से रिटायर होने के बाद वह वहीं बस गए।