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एसटीएफ का सीमेंट फैक्टरी पर छापा

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शाहजहांपुर। बरेली की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और शाहजहांपुर एसओजी ने सोमवार रात नकली सीमेंट बनाए जाने की सूचना पर कांट थाना क्षेत्र के जमौर औद्योगिक एरिया में चल रही एक सीमेंट फैक्टरी में छापा मारा। फैक्ट्री मालिक विक्रम तनेजा ने संबंधित कागजात टीम को दिखाए। पुलिस के मुताबिक फैक्ट्री मालिक के पास ब्रांड रजिस्ट्रेशन के कागज तो मिले, लेकिन मैन्यूफैक्चरिंग और पैकिंग लाइसेंस के कागजात नहीं दिखा पाए। छापे के दौरान एसपी, एसपी सिटी समेत कई अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।
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एसटीएफ, बरेली को जमौर में नकली सीमेंट बनाए जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद एसटीएफ टीम ने शाहजहांपुर एसओजी के साथ सोमवार रात करीब आठ बजे ऋषिकेश सीमेंट कंपनी में छापा मारा। एसटीएफ ने वहां पर कर्मचारियों से पूछताछ की। साउथ सिटी में रहने वाले फैक्ट्री के मालिक विक्रम तनेजा भी मौके पर आ गए। एसटीएफ ने उनसे पूछताछ की। इसके बाद विक्रम तनेजा ने फैक्ट्री से संबंधित कागजात दिखाए। विक्रम तनेजा ने बताया कि वह लखीमपुर के रहने वाले हैं और शाहजहांपुर में साउथ सिटी में रहकर 2015 से सीमेंट फैक्ट्री चला रहे हैं। उनके पास सीमेंट के छह ब्रांड रजिस्टर्ड हैं। उनके सभी मानक पूरे हैं। पुलिस की पूछताछ में विक्रम तनेजा ने बताया कि वह मध्य प्रदेश से क्लिंकर और रोजा थर्मल पॉवर से फ्लाईएश मंगाकर सीमेंट बनाते हैं। उनका माल कई जिलों में सप्लाई होता है। इसके बाद पुलिस टीम वापस लौट गई। फिर बांट-माप विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर बोरियों का वजन और माप कराई। देर रात तक टीम फैक्ट्री की जांच करती रही। पुलिस के मुताबिक फैक्ट्री मालिक के पास रजिस्टर्ड ब्रांड बड़ी कंपनियों के नामों से मिलते-जुलते हैं। बड़ी कंपनियों से आधे रेट पर सीमेंट बेची जाती थी। मौके से हजारों की संख्या में विभिन्न ब्रांड के बोरे बरामद हुए हैं। फैक्ट्री मालिक मैन्यूफैक्चरिंग और पैकिंग से संबंधित कागजात नहीं दिखा पाए हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि नकली सीमेंट सप्लाई की जा रही थी और मानक का पालन नहीं किया जा रहा था। सीमेंट अधिकतर देहात क्षेत्र में बेची जाती थी।
नकली सीमेंट बनाए जाने की सूचना पर पुलिस ने छापा मारा था। अभी मानकों की जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
एसपी एस आनंद
नकली सीमेंट से कई गुना बढ़ जाता है निर्माण ढहने का खतरा
यह तो रासायनिक जांच से स्पष्ट हो सकेगा कि भारी मात्रा में पकड़ी गई सीमेंट की गुणवत्ता क्या थी लेकिन निर्माण कार्य से जुड़े अभियंता भी मानते हैं कि सीमेंट को मजबूती देने वाले आयरन, सिलिका, मैगनीज आदि कई घटकों की मात्रा नकली सीमेंट में निर्धारित मानक से कम हो सकती है। किसी भी निर्माण कार्य में ऐसे सीमेंट का इस्तेमाल करने पर पूरी लागत लगाने के बावजूद तैयार ढांचा की आयु कम होने से दोहरा नुकसान होता है। साथ ही असमय निर्माण ढहने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
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लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता ओपी वर्मा के अनुसार उच्च गुणवत्ता वाले किसी भी ब्रांडेड सीमेंट में कैल्सियम (चूना), क्ले (मिट्टी), आयरन, मैगनीज, सिलिका आदि घटकों का निश्चित अनुपात में प्रयोग किया जाता है। इन सभी घटकों को एक निश्चित समय तक ग्राइंडर में पीसा जाता है। इस पाउडर की गोलियां (क्लिंकर) बनाकर सुखाने के बाद उन्हें दोबारा पीसा जाता है और तब जाकर बेहतर सीमेंट तैयार होता है। अब फ्लाई ऐश अर्थात कारखानों से निकलने वाली राख से बने पोर्टलैंड पोजलाना सीमेंट (पीपीसी) भी निर्माण कार्य में प्रयुक्त किया जा रहा है।
एक्सईएन के अनुसार आयरन पाउडर सीमेंट को मजबूती देता है और उसी के मिले होने के कारण सीमेंट में भूरापन आता है। चूंकि आयरन महंगा पड़ता है, इसलिए नकली के धंधेबाज सीमेंट में उसकी मात्रा कम करके क्ले ज्यादा डाल देते हैं। सिलिका और मैगनीज की कमी भी सीमेंट को कमजोर बनाती है। ऐसे सीमेंट से कोई भवन बनाने पर उसका तत्काल कोई कुप्रभाव भले ही नहीं दिखे, लेकिन भवन की आयु कम हो जाती है। यही नहीं, भवन ढहने की दशा में जान-माल की क्षति भी होती है। इससे पहले रोजा थाना क्षेत्र में दिसंबर 2020 में नकली सीमेंट बनाने की फैक्ट्री पकड़ी जा चुकी है। दस से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए गए थे।
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