निगोही के चक बरैंचा गांव में बनी गोशाला में बीमार गाय और चरनी में पड़ा सूखा भूसा। संवाद
निगोही। चक बरैंचा गांव की अस्थायी गोशाला में अव्यवस्थाएं हावी हैं। 65 निराश्रित गोवंशों के संरक्षण का दावा करने वाली गोशाला में न हरे चारे की समुचित व्यवस्था है, न साफ-सफाई की। बीमारी से दो गायें हड्डियों का ढांचा बनकर मरणासन्न अवस्था में पड़ी हैं, लेकिन उनका उपचार तक नहीं कराया गया है।
ब्लॉक मुख्यालय से अधिक दूरी होने के कारण गोशाला की नियमित निगरानी नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी यहां शायद ही कभी पहुंचते हैं। इसी का असर है कि सचिव और ग्राम प्रधान भी व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर नहीं दिख रहे हैं। पशुओं की देखभाल के लिए तैनात गोपालक भी पर्याप्त मानदेय नहीं मिलने से परेशान हैं।
गोशाला नदी किनारे होने के कारण हर वर्ष बाढ़ की चपेट में आ जाती है। पिछले वर्ष आई बाढ़ में दो गोवंशीय पशुओं की मौत हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद गोशाला का परिसर ऊंचा कराने के लिए मिट्टी नहीं डलवाई गई। आरोप है कि पशुओं को हरा चारा उपलब्ध कराने के बजाय सूखा भूसा खिलाया जा रहा है।
शासन के निर्देशों के विपरीत गोशाला में तीन सांड़ भी रखे गए हैं। उनकी आपसी लड़ाई में कई गायें घायल हो जाती हैं। इसके अलावा मवेशियों के लिए पर्याप्त छायादार स्थान भी नहीं है। छोटे से टिनशेड के नीचे ही पशु धूप और बारिश से बचने के लिए मजबूर हैं।
ग्राम प्रधान मदन लाल ने बताया कि वह कुछ दिनों से बाहर थे। जल्द ही गोशाला की व्यवस्थाएं बेहतर कराई जाएंगी। पंचायत सचिव प्रशांत कंचन का कहना है कि पशुओं के चारे की समुचित व्यवस्था है और मंगलवार तक सभी कमियां दूर कर बीमार पशुओं का उपचार भी करा दिया जाएगा। एसडीएम नीलिमा यादव ने कहा कि गोशाला की स्थिति की जांच के लिए टीम भेजी जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।