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रिपोर्ट को निरस्त कर अग्रिम विवेचना के दिए आदेश

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शाहजहांपुर। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ओमवीर सिंह ने हत्या के एक मामले में प्रभारी निरीक्षक जलालाबाद द्वारा प्रेषित अंतिम रिपोर्ट को निरस्त कर इस मामले में अग्रिम विवेचना करने का आदेश दिया है। इस संबंध में रिपोर्ट 15 अप्रैल 2021 तक न्यायालय भेजने का आदेश दिया गया है।
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प्रकरण में विवेचक द्वारा विवेचना में की गई लापरवाही एवं शिथिलता के संबंध में आवश्यक कार्रवाई के लिए पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश, पुलिस महानिरीक्षक बरेली एवं पुलिस अधीक्षक शाहजहांपुर को लिखने का आदेश दिया है। अभियोजन के अनुसार जलालाबाद क्षेत्र के गांव कूरावंडा निवासी हेतराम ने न्यायालय में आपत्ति प्रार्थना पत्र दिया है कि 17 अगस्त 2013 को उसके गांव में हनुमंत की माता का दसवां संस्कार था। जिसमें छेदालाल के साथ उसका भाई जवाहर लाल साइकिल पर बैठकर चला गया। नया गांव जाकर काफी देर तक ये लोग शराब पीते रहे। रात करीब 8:30 बजे दुमकापुर रोड गांव की तरफ पैदल चलते गांव के लोगों ने देखा। फायर की आवाज पर वादी व गांव के लोगों ने देखा कि उसके भाई जवाहरलाल की लाश कच्ची सड़क पर पड़ी हुई है। उसके भाई की हत्या रुपये के लेनदेन के कारण उसके गांव के व्यास, उसके साथी बाबूराम, रामवीर ने साथ मिलकर की है। विवेचक द्वारा मुल्जिमानों का बयान तोड़ मरोड कर लिखा है। मुकदमे की विवेचना साजिश से भरी पड़ी है।
न्यायालय ने इस संबंध में उच्च न्यायालय के आदेश 15 अप्रैल 2014 में वर्तमान प्रकरण में निर्भीक तरीके से विवेचना करने के आदेश का अवलोकन करने के बाद विवेचक शक्ति सिंह तोमर द्वारा विवेचना में साक्ष्य संकलित किये जाने में गंभीर लापरवाही पाई। कहा कि इस मामले में तथ्यों को ध्यान में रखकर प्रकरण में अग्रिम विवेचना कराया जाना न्यायोचित है।
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