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बिछड़े शावक को साथ ले गई मादा तेंदुआ

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demo photo - फोटो : अमर उजाला
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वन विभाग ने खेत के बीच में ही बाड़ा लगाकर उसमें तेंदुए के बच्चे को रखा था
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कैमरे में कैद हुई शावक की अपनी मां के साथ जाते हुए तस्वीर

बांकेगंज। गोला रेंज के गदियाना गांव में बृहस्पतिवार को गन्ने के खेत से जुदा हुए तेंदुआ शावक को उसकी मां से मिलाने की कोशिश आखिर रंग लाई। बीती रात करीब दो बजे अपने बिछड़े शावक को ढूंढते हुए मादा तेंदुआ बाड़े के पास पहुंची। इस बीच बाड़े में बैठा शावक मां के देखते ही वहां से निकलकर उसके साथ चला गया। कैमरे में कैद हुई मादा तेंदुआ की तस्वीर और दोनों के पगचिन्ह मिलने पर इस बात की पुष्टि हुई है।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि वन विभाग ने बिछड़े शावक को मां से मिलाने की कोशिश में हर्रेया गांव के पास बाड़ा बनाकर शावक को उसमें रखा था। डीएफओ साउथ समीर कुमार ने वन कर्मियों की टीम गठित कर शावक की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए थे। मादा तेंदुआ और शावक की लोकेशन ट्रैस करने के लिए चार कैमरे भी लगाए थे।
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बृहस्पतिवार की रात करीब दो बजे मादा तेंदुआ बिछड़े शावक को तलाशते हुए बनाए गए बाड़े के पास पहुंची। मां को देखते ही बाड़े में बैठा शावक वहां से निकलकर अपनी मां के साथ चला गया। शुक्रवार सुबह लगाए गए चार कैमरों की तस्वीर खंगालने पर एक कैमरे में तेंदुए की तस्वीर कैद हुई। साथ ही तेंदुआ और शावक के खेतों में एक साथ पगचिन्ह मिलने पर इस बात की पुष्टि हुई है कि बिछड़े शावक को उसकी मां से मिलाने की कोशिश में वन विभाग कामयाब रहा है।

वन्यजीवों को न पकड़ें ग्रामीण, नहीं तो होगी कार्रवाई

दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने ग्रामीणों को आगाह किया है कि वो बिछड़े वन्यजीवों को पकड़ने की जगह इसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दें। ऐसा करने पर संबधित के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि मां से बिछड़े वन्यजीवों को नंगे हाथों से छूने पर उसमें इंसानों की दुर्गंध आने से मादा बाघ, तेंदुआ आदि बिछड़े शावक को दोबारा अपने कुनबे में शामिल नहीं करते। उन्होंने बताया कि 10 से 12 दिन तक के शावक को नंगे हाथों से छूने पर मादा वन्यजीव शावकों का तिरस्कार कर देते हैं। गनीमत यह रही कि गदियाना गांव के पास मां से बिछड़े शावक की उम्र एक से डेढ़ माह थी, जिससे मादा तेंदुआ उसे अपने साथ ले गई। ऐसा न होने पर ग्रामीणों को तेंदुआ शावक पकड़ना काफी मंहगा पड़ सकता था।
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