एमपी-एमएलए कोर्ट ने सुनाया फैसला
चिन्मयानंद के हाजिर होने के बाद अदालती प्रक्रिया में तेजी आई। बृहस्पतिवार को एमपी-एमएलए कोर्ट/अपर जिला जज तृतीय अहसान हुसैन ने मुकदमे का फैसला सुनाया। अदालत ने स्वामी चिन्मयानंद को दोषी ठहराने के लिए पेश किए गए साक्ष्यों को पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने चिन्मयानंद को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया।
अदालत का फैसला आने पर चिन्मयानंद ने राहत की सांस ली। हालांकि अदालत से निकलने के बाद वह मीडिया से बात किए बिना चले गए। उनके वकील फिरोज हसन खां ने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से छह गवाह पेश किए गए। इनमें मेडिकल करने वालीं डॉ. सईद फातिमा, एफआईआर लेखक खुर्शीद अहमद, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. एमपी गंगवार, बीपी गौतम और विवेचक मुकदमा इंस्पेक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह शामिल थे।
बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता फिरोज हसन खां ने सभी गवाहों से जिरह की। जिरह की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विशेष लोक अभियोजक नीलिमा सक्सेना ने और बचाव पक्ष से अधिवक्ता फिरोज हसन खां और मनेंद्र सिंह ने अदालत में अपने तर्क पेश किए। इसके बाद न्यायालय ने अपना निर्णय सुनाया।