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सिस्टम बेहाल: गुनारा में पन्नियां तानकर ठंड में गुजारा कर रहे गरीब परिवार

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जलालाबाद में अपने घर की छत पर पन्नी डालकर रहे रही शाहरुन्निसा । संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
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जलालाबाद। गरीबों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ सिस्टम के लचर रवैये की वजह से उन तक नहीं पहुंच रहा। गरीबों को पेट भरने के लिए न तो राशन मिल रहा है, न ही सिर छिपाने के लिए छत। कुछ दिन पहले गुनारा ग्राम पंचायत के मजरा कोठीवाला में ठंड से कमला देवी की मौत हो गई थी। कमला जिस घर में रह रहीं थीं, उसमें न तो खिड़की दरवाजे लगे थे और न ही छत थी। ऊपर जो टिनशेड पड़ी थी उसमें भी तमाम सुराख थे, जिनसे आने वाली कड़ाके की सर्दी में ठंडी हवा ने उन्हें ऐसा जकड़ा कि ठिठुरकर मौत के आगोश में समा गईं। इससे पहले कमला आवास और राशन का लाभ पाने के लिए अफसरों की चौखट पर सिर पटकती रहीं, लेकिन उनकी लाचारी पर किसी को तरस नहीं आया और जब वह इस दुनिया से रुखसत हो गई तब पता चला कि उनका राशन कार्ड पहले ही बन चुका था, लेकिन कोटेदार उन्हें राशन नहीं दे रहा था। आवास आवंटन में धांधली को लेकर इस गांव के प्रधान पर एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है, वह साल भर से फरार चल रहा है, लेकिन सांठगांठ के चलते पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर रही। अब भी इस गांव में कई ऐसे अति गरीब लोग हैं, जो बेहद गरीबी में गुजर कर रहे हैं, लेकिन उन तक योजना का लाभ नहीं पहुंच पाया है।
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गांव की रेशमा पत्नी रुआब हसन भूमिहीन होने से मजदूरी करके परिवार की गाड़ी चला रही हैं। कुछ जमीन थी, जिस पर कर्ज लेकर चहारदीवारी बना ली और उस पर पन्नी डालकर परिवार सहित शरण लिए हैं। इसी गांव की शाहरुन्निसा पत्नी अब्दुल हसन फूस की मड़ैया डालकर रह रही थीं। बरसात में वह गिर जाने से पूरा परिवार खुले आसमान के नीचे आ गया, लेकिन सिस्टम का दिल नहीं पसीजा। शाहरुन्निसा के मुताबिक पैसे न होने के कारण उनका परिवार दो दिन खुले आसमान तले रहा तो दिल्ली में काम करने वाले जेठ जहीर ने अपने घर में पनाह दी। यही हाल, रहीसा के कुनबे का भी है। रहीसा के पति वाजिद की आठ साल पहले मौत हो जाने के बाद से मां-बेटे आज भी पन्नी डालकर कच्ची कोठरी में गुजर-बसर कर रहे हैं।
गांव की श्यामकली पत्नी विजपाल, मालती पत्नी बाबू, सदा प्यारी पत्नी रामचंद्र, कमलेशा पत्नी फकीरे समेत करीब 15 ऐसे परिवार हैं, जिन्हें आवास समेत किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा। इन परिवारों की मानें तो उन्होंने आवास के लिए प्रधान से लेकर सेक्रेटरी के कई बार चक्कर लगाए। कुछ दिन पहले एसडीएम से भी शिकायत की।
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एसडीएम ने बीडीओ को भेजे पत्र में निर्धन कमला की मौत का उल्लेख करते हुए कहा है कि ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने को कहा है। बीडीओ को सभी शिकायतकर्ताओं की जांच कराकर पात्रता के आधार पर जो भी सरकारी योजना का लाभ दिया जा सकता हो, उसे मुहैया कराने के निर्देश दिए गए हैं। - अजय कुमार, तहसीलदार
आवास स्वीकृत कराने को प्रधान ने लिए 35 हजार रुपये, एफआईआर के बाद प्रधान फरार
गुनारा में अपात्रों को आवास दिए जाने के आरोप जांच में सही पाए जाने पर 15 दिसंबर 2018 को जलालाबाद के तत्कालीन एसडीएम विजय शर्मा की ओर से ग्राम प्रधान मोहर्रम अली के खिलाफ कोतवाली में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13/7 एवं आईपीसी की धारा 504 एवं 420 के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई, लेकिन गिरफ्तारी से बचने को ग्राम प्रधान फरार हो गए और अब न्यायालय में आत्म समर्पण करने को प्रार्थना पत्र भिजवाया है। दर्ज एफआईआर मेें शिकायतकर्ताओं द्वारा वायरल की गई वीडियो क्लिपिंग का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि ग्राम प्रधान ने आवास योजना का लाभ दिलाने में मंत्री तक पैसे लेने की बात कही गई है। गांव के पंचायत भवन पर हुई जांच में सहायक विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत सचिव एवं अन्य तमाम ग्रामीणों की मौजूदगी में आवास लाभार्थी आसमां पत्नी निसार व फजरूद्दीन पुत्र इसरार ने स्वीकार किया कि आवास स्वीकृत कराने को उन्होंने ग्राम प्रधान को क्रमश: 35 हजार व 30 हजार रुपये भी दिए थे। इसी गांव की तारा बेगम पत्नी लियाकत ने बताया कि प्रधान द्वारा आवास दिलाने को उनसे भी 30 हजार मांगे गए, लेकिन रकम नहीं दे पाने पर उसके बेटे नजावत अली के नाम से स्वीकृत आवास गांव में रहने वाले इसी नाम के एक अन्य व्यक्ति को दे दिया गया।
प्रधान की तलाश में कई बार दबिशें दी चुकी हैं, लेकिन वह नहीं मिले। ग्राम प्रधान की ओर से कोर्ट में सरेंडर के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया है। - ब्रह्मपाल सिंह, सीओ

जलालाबाद में अपने घर की छत पर पन्नी डालकर रहे रही रेशमा । संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR

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