शाहजहांपुर। छेड़खानी, पाक्सो एक्ट और एससीएसटी एक्ट के मामले में विवेचक तत्कालीन सीओ सुमित शुक्ला के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए अदालत ने आदेश दिए हैं। वहीं, इस मामले में दोषी को पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध से दोषमुक्त करते हुए एससीएसटी एक्ट व छेड़खानी में चार वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।
चौक कोतवाली क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि कक्षा 12 में पढ़ने वाली उसकी बेटी का आमिर उर्फ पीटर बाइक से पीछा करता था। 13 जुलाई 2017 को सुबह बेटी स्कूटी से स्कूल जा रही थी। तिराहे पर आमिर अपने दो साथियों के साथ मारुति वैन से आया और बेटी को जबरदस्ती वैन में डाल लिया।
बेटी की चीख-पुकार सुनकर वह और उसके भाई मौके पर आ गए। इस पर आमिर ने तमंचे से फायर कर दिया। उसने उन लोगों को जातिसूचक गालियां दीं और धमकाया। पुलिस ने विवेचना के बाद आमिर उर्फ पीटर के खिलाफ छेड़खानी, धमकाने, पॉक्सो एक्ट, एससीएसटी एक्ट समेत अन्य धाराओं में आरोपपत्र अदालत भेजा।
मुकदमा चलने के दौरान अदालत ने पाया कि विवेचक क्षेत्राधिकारी सुमित शुक्ला ने पॉक्सो अधिनियम में विहित उपबंधों का घोर उल्लंघन करते हुए विवेचना की है। बिना समुचित साक्ष्य संकलन व विवेचना के ही पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत न्यायालय में आरोपपत्र भेजा है। इससे यह साबित होता है कि मामले के विवेचक ने अत्यंत ही लापरवाही व कर्तव्यविहीन आचरण किया है।
विवेचक की ओर से प्रस्तुत बयानों से स्पष्ट है कि मामले की प्राथमिकी 14 जुलाई 2017 को दर्ज की गई जबकि पीड़िता का बयान 17 जुलाई को अंकित किया गया। पाक्सो अधिनियम में 24 घंटे के अंदर पीड़िता के बयान तथा चिकित्सीय परीक्षण आवश्यक माना गया है। पीड़िता की आयु निर्धारण के लिए आवश्यक साक्ष्य संकलन सर्वप्रथम आवश्यक है तभी मामला पॉक्सो न्यायालय को संदर्भित होगा।
विवेचक ने बिना कोई आवश्यक साक्ष्य संकलन किए आरोपपत्र पॉक्सो न्यायालय में प्रेषित किया है। अदालत ने मामले में विवेचक की लापरवाही, कर्तव्यहीनता और विधिक उपेक्षा के मद्देनजर उप्र शासन से संबंधित के विरुद्ध प्रभावी विभागीय कार्रवाई करने की अपेक्षा की है। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो प्रेमशंकर ने दोषी आमिर उर्फ पीटर को चार वर्ष के कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
किशोरी से दुष्कर्म के दोषी को 20 वर्ष का कारावास
शाहजहांपुर। नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को अदालत ने 20 वर्ष के कारावास की सजा से दंडित किया है।
तिलहर थाना क्षेत्र के रहने वाले एक व्यक्ति ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि उसकी 15 वर्षीय बेटी की रूपेश कुमार से बातचीत होती थी। वह अक्सर उसकी नामौजूदगी में घर आता था। 19 जनवरी 2024 को उसकी बेटी को रूपेश कुमार बहला फुसलाकर घर से कहीं ले गया। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने के बाद विवेचना कर किशोरी को तलाश किया।
किशोरी के पिता ने अदालत में अपने बयान में बताया कि उसकी बेटी को पुलिस ने लगभग डेढ़ महीने के बाद बदायूं के उझानी के मोहल्ला भर्रा टोला के रहने वाला मोहित उर्फ लालता के पास से तलाश किया था। दिल्ली में लालता ने उसकी मर्जी के बिना उससे शादी की और एक कमरे में बंधक बनाकर उसकी मर्जी के विरुद्ध गलत काम किया।
पुलिस ने रूपेश की नामजदगी गलत पाई। गवाहों के आधार पर मोहित उर्फ लालता का नाम प्रकाश में आया। पुलिस ने मोहित के खिलाफ दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट व अन्य धाराओं में आरोपपत्र अदालत भेजा। अदालत में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात और साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कृष्णलीला यादव ने मोहित उर्फ लालता को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पर 14 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। संवाद