गर्रा नदी और उसके राजघाट की सफाई को लेकर अफसरों को जगाने की मुहिम में जुटे कांग्रेस सेवादल के कार्यकर्ताओं और सिटी मजिस्ट्रेट के बीच शुक्रवार को जमकर नोकझोंक हुई। ज्ञापन देते वक्त कांग्रेसियों ने कार्यवाही न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी तो दोनों पक्षों में वाद-विवाद होने लगा। हालांकि, बाद में मौके की नजाकत और सिटी मजिस्ट्रेट कमलेश द्विवेदी के तीखे तेवर देख कांग्रेस कार्यकर्ता चले गए।
हुआ यह कि गर्रा नदी और उसके घाट की सफाई करने के लिए अफसरों को जगाने की मुहिम में जुटे कांग्रेस सेवादल के कार्यकर्ता शुक्रवार को कलक्ट्रेट पहुंचे। वहां उन्होेंने नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया। इस दौरान सेवादल के शहर अध्यक्ष संजीव गुप्ता ने सिटी मजिस्ट्रेट को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया। ज्ञापन में नदी और घाट की सफाई कराने के साथ वहां से शराब का ठेका हटाए जाने आदि कई मांगों का उल्लेख किया गया।
सिटी मजिस्ट्रेट ज्ञापन पढ़ रहे थे कि इसी बीच शहर अध्यक्ष ने उनसे जानना चाहा कि इस संबंध में गत पांच दिसंबर को दिए ज्ञापन पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं हुई। सवाल सुनते ही सिटी मजिस्ट्रेट भड़क उठे। बोले, ज्यादा नेतागीरी की बातें न करें, ज्ञापन देना हैं तो दें, नहीं तो जाएं। शहर अध्यक्ष ने नदी और घाट की सफाई न होने पर सड़कों पर आंदोलन की चेतावनी दी तो सिटी मजिस्ट्रेट भी तैश में आकर बोल पड़े कि जो करना हो करें।
चूंकि, उस वक्त कलक्ट्रेट में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस भी मौजूद थी। इसलिए सिपाहियों का घेरा कसते देख शहर अध्यक्ष गुप्ता लौट पड़े। उनके साथ आए रामकुमार वर्मा, फुरकान कुरैशी, सावित्री शर्मा, सचिन कश्यप, अदनान खां, रवि कैथवार, संतोष गुप्ता, प्रवीण कुमार आदि तमतमाए चेहरे लेकर लौट गए।
वार्ता को बुलाए संगठन के दो प्रतिनिधि
‘सेवादल के कार्यकर्ता कुछ ज्यादा ही अनापशनाप बोल रहे थे। संगठनों द्वारा ज्ञापन देना सामान्य बात है। कांग्रेसियों से सिर्फ इतना कहा कि वे ज्ञापन देना चाहते हों तो दें, अनावश्यक बात न करें। इस मुद्दे पर वार्ता के लिए सेवादल से दो प्रतिनिधि भेजने को कहा गया है।’
- कमलेश द्विवेदी, सिटी मजिस्ट्रेट