शाहजहांपुर। कहीं पे निगाहें-कहीं पे निशाना! चिन्मयानंद-छात्रा प्रकरण को लेकर सोमवार को कांग्रेस खेमे में दिन भर चले हाई वोल्टेज ड्रामा को लेकर पार्टी के अंदर उठे मतभेद से यही जाहिर हो रहा है कि जो लोग इस पूरे एपीसोड के अगुआकार बने, दिखावे के लिए उनके निशाने पर भले ही चिन्मयानंद रहे हों, लेकिन असल मकसद प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी हासिल करना है। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद एवं उनके परिवार से सीधा जुड़ाव रखने वाले वरिष्ठ कांग्रेसी भी मानते हैं कि जिस तरह आनन-फानन पीड़िता के समर्थन मेें पद यात्रा की पटकथा लिखी गई, उसके पीछे येन केन प्रकारेण प्रदेश अध्यक्ष पद हथियाना खास मकसद है।
कांग्रेस की जिला इकाइयां सांगठनिक फेरबदल करने के लिए पहले ही भंग की जा चुकी हैं। इससे पहले प्रदेश कार्यकारिणी भी बदलाव होना है। प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस विधायक दल के नेता अजय कुमार लल्लू प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं जबकि उनका विरोधी धड़ा इस पद के लिए जितिन प्रसाद को कहीं अधिक उपयुक्त मानता है क्योंकि वह दस वर्ष सांसद और सात वर्ष विभिन्न मंत्रालयों में राज्यमंत्री का अनुभव प्राप्त हैं। यह अलग बात है कि गत विधानसभा चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव के पहले तक उन्हें कई बार यह ओहदा नेतृत्व की ओर से ऑफर किया गया, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए हर बार यह प्रस्ताव विनम्रता से ठुकरा दिया।
पार्टी के भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार चिन्मयानंद प्रकरण चर्चा में आने पर प्रदेश अध्यक्ष पद के दावेदार ने प्रियंका गांधी को सूबे में मृतप्राय कांग्रेस को पुनर्जीवित करने के लिए शाहजहांपुर से लखनऊ तक पदयात्रा की थीम समझाई और उन्हें विश्वास में ले लिया, लेकिन जिले के कांग्रेसियों को इस अहम फैसले की जानकारी दो दिन पहले लखनऊ से शाहजहांपुर रवाना होने पर दी। जिले के कांग्रेसियों से इस कार्यक्रम की जानकारी मिलने के बाद जितिन प्रसाद रविवार शाम यहां पहुंचे, लेकिन इससे पहले पूरे प्रकरण में राष्ट्रीय नेतृत्व ने उनसे कोई फीडबैक नहीं लिया। जितिन भले ही इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हों, उनके निकटस्थ कार्यकर्ता इतने अहम कार्यक्रम में अपने नेता को विश्वास में नहीं लिए जाने से प्रदेश अध्यक्ष बनने के महत्वाकांक्षी नेता से खासे खफा हैं।
उनका कहना है कि पदयात्रा कार्यक्रम पर सहमति देने वाले देश-प्रदेश के शीर्ष नेताओं को पहले इस तथ्य की तहकीकात करानी चाहिए थी कि आखिर जिले के अन्य राजनीतिक एवं सामाजिक संगठन इस मुद्दे पर चुप्पी क्यों साधे हैं। यदि ऐसा किया गया होता तो पूरा प्रकरण दोनों पक्षों के आपराधिक कृत्य में लिप्त होना प्रमाणित होता और ऐसी स्थिति मेें आंदोलन की जल्दबाजी दिखाने के बजाय कानून सम्मत कार्रवाई के लिए थोड़ा इंतजार करना ज्यादा बेहतर होता।
प्रदेश अध्यक्ष पद हथियाने की महत्वाकांक्षा प्रदेश के कुछ नेताओं को यहां खींच लाई। चिन्मयानंद बलात्कारी नहीं हैं, लेकिन उनमें जागृत हुई तामसिक प्रवृत्तियों के कारण वह कुछ लोगों के व्यूहजाल में फंसकर षडयंत्र का शिकार हो गए। यह ऐसा मामला है, जिसमेें अपराध के चलते दोनों पक्ष जेल में हैं। कानून अपना काम कर रहा है, इसलिए जनांदोलन की कोई जरूरत नहीं थी। विरोध के स्वर केवल दिल्ली और लखनऊ में बैठे उन नेताओं ने उठाए, जो यथार्थ को नहीं जानते। पूर्वी यूपी की लॉबी ने प्रदेश अध्यक्ष पद की खातिर पश्चिमी यूपी तक धाक जमाने के लिए सोची समझी रणनीति के तहत जितिन के जिले में आंदोलन की स्क्रिप्ट लिखी।
-मनोज त्रिपाठी, निवर्तमान वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष, कांगे्रस
मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि प्रदेश के नेताओं ने जितिन प्रसाद को पद यात्रा कार्यक्रम की अधिकृत सूचना पहले दी अथवा नहीं। यह सही है कि विधायक दल के नेता दो अन्य पदाधिकारियों के साथ शनिवार शाम यहां आ गए, लेकिन पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री यहां रविवार शाम पहुंचे। प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए किसके नाम पर विचार हो रहा है, यह शीर्ष नेतृत्व ही बता सकता है।
-कौशल मिश्रा, निवर्तमान जिला अध्यक्ष, कांग्रेस