अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गिरने के बावजूद ऑयल कंपनियों द्वारा पेट्रोल-डीजल के दामों में लगातार की जा रही बढ़ोतरी को निशाने पर लेते हुए जिले के कांग्रेसी बृहस्पतिवार को खूब गरजे। साइकिलों पर सवार होकर कलक्ट्रेट पहुंचे और नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया और पेट्रोलियम पर छाई महंगाई के लिए केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकारों की उदासीनता को जिम्मेदार ठहराया। प्रदर्शन के दौरान ज्ञापन लेने के लिए देर तक कोई अधिकारी नहीं पहुंचा तो उनका गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने कार्यालयों के दरवाजों पर डंडे पीटने शुरू कर दिए।
प्रसाद भवन स्थित कांग्रेस के कैंप कार्यालय में इकट्ठा हुए पार्टी कार्यकर्ता जिलाध्यक्ष कौशल मिश्रा के नेतृत्व में बृहस्पतिवार को दोपहर तिरंगे लहराते हुए कलक्ट्रेट में दाखिल हुए, उस वक्त डीएम अमृत त्रिपाठी ग्रामीण क्षेत्र के दौरे पर निकल चुके थे। सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार भी कलक्ट्रेट स्थित कार्यालय में नहीं थे। इसलिए विभिन्न संगठनों के ज्ञापन लेने के लिए अतिरिक्त मजिस्ट्रेट पूजा यादव डीएम के कक्ष में बैठी थीं, लेकिन जिस वक्त कांग्रेसी नारेबाजी में जुटे थे, अतिरिक्त मजिस्ट्रेट भी कक्ष से उठकर कहीं चली गईं। इधर,अफसरों के आने में देरी पर कार्यकर्ताओं का रोष उबाल खा गया और उन्होंने झंडे निकालकर उनके डंडों से भूतल पर बने कार्यालयों के दरवाजे पीटने शुरू कर दिए और महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष सावित्री शर्मा ने रसोई गैस के खाली सिलिंडर सिर पर रखकर नारेबाजी तेज कर दी।
हालांकि, शोरशराबा सुनकर एडीएम प्रशासन बच्चू सिंह और एडीएम फाइनेंस सर्वेश कुमार ने कांग्रेसियों को शांत कर उनका ज्ञापन लिया। राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन में कहा गया है कि मोदी सरकार ने देश में सभी चीजों पर एक टैक्स लगाने का वायदा किया था, इसलिए सरकार पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाए तो तेल कंपनियां की मनमानी पर अंकुश लग जाएगा। प्रदर्शन में पूर्व जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र दीक्षित, शहर अध्यक्ष तसनीम अली खां, शहर प्रभारी जगदीश कुशवाहा, जिला महासचिव अनूप वर्मा, युवा कांग्रेस के शहर अध्यक्ष फुरकान अहमद कुरैशी, सेवादल के जिलाध्यक्ष अश्विनी द्विवेदी आदि ने कार्यकर्ताओं का नेतृत्व किया।