सालभर तक कॉलेज के शिक्षकों पर विश्वास और बोर्ड परीक्षा से पहले कोचिंग टीचर्स पर अंधविश्वास। छात्र-छात्राओं की यह सोच कितनी कारगर और कितनी घातक है, यह तो वही जानते होंगे, लेकिन कॉलेज के प्रधानाचार्य और शिक्षक इस बात से बेहद परेशान हैं कि इन दिनों कॉलेज में विद्यार्थियों की उपस्थिति एकदम नगण्य हो जाती है। शिक्षकों का मानना है कि छात्रों को ही नहीं, बल्कि उनके अभिभावकों को भी सोचना चाहिए कि वह कॉलेज को इग्नोर न करें। जो काम कॉलेज का शिक्षक कर सकता है वह कोचिंग संचालक कभी नहीं कर सकता। महीना-पंद्रह दिन में कोर्स खत्म कराने से अच्छी शिक्षा नहीं हासिल की जा सकती। कॉलेज को शैक्षिक पंचांग के अंतर्गत कोर्स बांटकर समयानुसार लेकर चलना पड़ता है, जबकि कोचिंग वाले भीड़ इकट्ठी करते हैं। छात्र-छात्राओं को चाहिए कि कॉलेज के पीरियड मिस न करें। कॉलेज के शिक्षक ही उनके सच्चे हितैषी हो सकते हैं। आखिर छात्रों की जिम्मेदारी उन्हीं की है। कोचिंग संचालक जिम्मेदारी नहीं ओढ़ सकते। कोचिंग में छात्राें का कीमती समय भी अधिक बर्बाद होता है। आइए, देखते हैं कि इस मामले में प्रधानाचार्यों का क्या कहना है?
कॉलेज मिस न करना अधिक बेहतर
कॉलेजों से बेहतर पढ़ाई कोचिंग संचालक नहीं करा सकते। कॉलेजों में विषय विशेषज्ञ अपने छात्रों की आदतों, उनकी कमजोरियों और अच्छाई-बुराई को बेहतर जानते हैं, इसलिए वह उसी अनुसार बच्चे को सिखाने का प्रयास करते हैं। एक-डेढ़ माह में कोई कोचिंग संचालक सिर्फ कोर्स पूरा करा सकता है, छात्र को प्लानिंग के तहत नहीं पढ़ा सकता। क्लास अटेंड करना छात्रों के लिए अधिक जरूरी है। इसलिए छात्र इन दिनों में कॉलेज मिस न करें, यह उनके हित में होगा।
- सैय्यद अब्दुल जुबैर कादिर, प्रधानाचार्य, इस्लामिया इंटर कॉलेज
कॉलेज शिक्षक पर विश्वास करें छात्र
कॉलेज के शिक्षक को इस बात का अनुभव होता है कि परीक्षा में क्या आ सकता है। टीचर की यही समझ छात्र को सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ाती है। कोचिंग पर अधिक विश्वास करना और परीक्षा के मौके पर अपने शिक्षक से दूर हो जाना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं कहा जा सकता। छात्र का भला एक शिक्षक ही समझ सकता है। विशेष रूप से एक-दो नंबर वाले सवाल कॉलेज में अधिक समझाए जा सकते हैं। यह समय कॉलेज में अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
- ललित मोहन, प्रधानाचार्य, देवी प्रसाद इंटर कॉलेज
क्लास रूम स्टडी अधिक उपयोगी
कॉलेज की पढ़ाई की तुलना कोचिंग से संभव नहीं है। कॉलेज का शिक्षक महत्वपूर्ण प्रश्नों को छांटकर उसकी तैयारी कराता है, जबकि कोचिंग वाले सिर्फ कोर्स पूरा कराने पर जोर देते हैं। कोर्स पूरा कराना ही महत्वपूर्ण नहीं होता। महत्वपूर्ण यह है कि छात्र को किस विधि से और क्या पढ़ाया जाए। यह समय क्लास रूम में स्टडी करने का है, न कि घूमने के बहाने कोचिंग लेने का। अच्छा तो यह है कि छात्र अपने शिक्षक से अतिरिक्त पूछताछ कर परीक्षा की बेहतर तैयारी करे।
- डॉ. राखी मिश्रा, प्रधानाचार्य, डॉ. सुदामा प्रसाद कन्या इंटर कॉलेज