पुलिस से उलझी मां, बोली- बेटा जिंदा है, नहीं ले जाने दूंगी
बेटे की मौत की सूचना के बाद मां रेशमा बेगम उसे गोद में उठाकर दहाड़े मारकर रोने लगीं। पुलिस शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजने पहुंची तो वह शव देने को तैयार नहीं हुईं। उनका कहना था कि बेटा जिंदा है और उसकी धड़कन चल रही है। वह असद को नहीं ले जाने देंगी। आसपास की महिलाओं ने उन्हें संभाला। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लिया। भाई की मौत से छह वर्षीय अर्श और चार वर्षीय मन्नत के आंसू भी नहीं थम रहे थे। जलालुद्दीन पत्नी और बच्चों को संभालते रहे।
इंसुलेटर लगाने और चेकिंग में लापरवाही, सपोर्टिंग तारों में उतर रहा था करंट
बिजली कर्मियों के अनुसार लाइन बनाते समय खंभे के सपोर्टिंग तार में करंट उतरने से बचाने के लिए इंसुलेटर लगाया जाता है। इंसुलेटर नहीं लगाने या टूट जाने पर खंभे के सपोर्ट के लिए लगाए गए अर्थिंग तार में करंट उतरने लगता है। नियम के अनुसार लाइनमैन को गश्त के दौरान ऐसे तारों की निगरानी कर इंसुलेटर लगाने का इंतजाम करना चाहिए। आरोप है कि जेई से लेकर लाइनमैन तक इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में अर्थिंग तारों में करंट उतरने से कई हादसे हो चुके हैं।