शाहजहांपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज में मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो रहीं हैं। अधिकतर वार्डों में खिड़की के शीशे टूटे होने से सर्द हवा के झोंकों से तीमारदार और मरीज ठंड से कंपकंपा रहे हैं। अपने कार्यालय में हीटर की तपिश का मजा लेने वाले अधिकारियों ने कागजों में मरीजों को सर्दी से बचाव के इंतजाम कर दिए हैं। खिड़की के टूटे शीशे और अतिरिक्त अलाव नहीं जलवाने से मरीज परेशान हैं।
410 बेड के राजकीय मेडिकल कॉलेज में सर्दी के मौसम में व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराने के बजाय अधिकारियों ने मुंह मोड़ लिया है। वार्डों की स्थिति को देखकर लगता है कि अफसर निरीक्षण करने के लिए आफिस से ही नहीं निकलते हैं। पतले और बिना धुले कंबल दिए जाने के बाद शुक्रवार को अस्पताल के वार्ड की खिड़कियों स्थिति की पड़ताल की गई।
प्रत्येक वार्ड में स्टाफ हीटर के सामने बैठकर तापता मिला। वहीं मरीज सर्दी में बेहाल थे। फीमेल सर्जिकल वार्ड में खिड़की का शीशा टूटा मिला। यहां से आने वाली सर्द हवा पूरे वार्ड के मरीजों को रजाई ओढ़ने को मजबूर कर देती है। तीसरी मंजिल पर हड्डी और ईएनटी वार्ड की स्थिति काफी ज्यादा खराब मिली। वार्ड में अधिकतर खिड़की के शीशे टूटे मिले। कमी छिपाने के लिए यहां पर पर्दा डाल दिया गया था। रात में हवा से बचने को तीमारदारों ने गत्ता और कपड़ा बांध दिया। उससे भी हवा नहीं रुक सकी। दूसरी मंजिल पर दवा के गोदाम की ओर जाने वाली गली में तीमारदारों के लिए लाइन से बेड पड़े हैं। यहां पर पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती बच्चों के तीमारदार समय गुजारते हैं। यहां की खिड़की के टूटे शीशे भी सही नहीं कराए गए। यहां पर बोरी, गत्ता और कपड़ा बांधकर हवा रोकने का प्रयास किया, लेकिन फायदा नहीं निकला। कुछ वार्ड में शीशे के बजाय महीन जाली लगी है। उन वार्डों के मरीज सर्दी में बेहाल हैं। अधिकारियों की लापरवाही की वजह से मरीज और तीमारदार सर्द हवा में जूझने को मजबूर हैं।
हीटर के सहारे अफसर, मरीजों की नहीं ले रहे सुध
-अस्पताल के अधिकारी अपने अधीनस्थों की रिपोर्ट के सहारे ही चल रहे हैं। वे खुद वार्डों में भ्रमण करने जाते तो शायद उन्हें कमियां पकड़ में आ जाती। जिस मेडिकल कॉलेज की खिड़कियों के शीशे तक न दुरुस्त हों, वहां की अन्य सुविधाओं की स्थिति का महज अंदाजा लगाया जा सकता है। अधिकारी सर्द मौसम में हीटर के गर्म वातावरण से निकलकर मरीजों की सुध नहीं ले रहे हैं। इसीलिए मात्र पतले कंबल ही देकर दायित्वों से पल्ला झाड़ लिया जाता है।
-बेटे के बीमार होने पर उसे भर्ती कराया था। वार्ड में खिड़की के पास ही बेड है। यहां का शीशा टूटा होने से सर्द हवा काफी परेशान करती है। टूटे शीशे से बंदर अंदर घुसने का प्रयास करते हैं।
रईसा बेगम, गांव मुड़िया
-पोषण पुनर्वास केंद्र में पौत्री भर्ती है। दिन में बाहर खिड़की के पास लेटना होता है। खिड़की टूटी होने से हवा से बचने को गत्ता बांध लिया है। ठंड में हवा आने से काफी दिक्कत आती है।
शाहीन, गांव पौटा
-टूटे खिड़की के शीशों को सही कराया जाता है। मरीजों को कंबल दिए जाते हैं। आवश्यकता के अनुसार, कंबलों की खरीद भी की जाती है।
डॉ.राजेश कुमार, प्राचार्य-राजकीय मेडिकल कॉलेज
राजकीय मेडिकल कॉलेज में ईएनटी वार्ड में खिड़की के टूटे शीशे। संवाद
राजकीय मेडिकल कॉलेज में ईएनटी वार्ड में खिड़की के टूटे शीशे। संवाद
राजकीय मेडिकल कॉलेज में ईएनटी वार्ड में खिड़की के टूटे शीशे। संवाद
राजकीय मेडिकल कॉलेज में ईएनटी वार्ड में खिड़की के टूटे शीशे। संवाद