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गर्मियों में फिर बढ़े दूध के दाम, मध्य आयवर्गीय परिवार परेशान

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शाहजहांपुर। गर्मी के चालू सीजन में पैक्ड दूध का कारोबार करने वाली कंपनियों ने एक बार फिर दूध और अन्य दुग्ध उत्पादों के दाम दो से पांच रुपये किलो तक बढ़ा दिए हैं। इससे महंगाई के बोझ से पहले से दबे मध्य और निम्न आय वर्ग के लोग परेशान हो उठे हैं।
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आधा लीटर दूध की थैली पर दो रुपये और एक किलो दही की पैकिंग पर तीन से पांच रुपये बढ़ जाने वे परिवार घर का बजट बिगड़ने को लेकर ज्यादा चिंतित हैं, जहां छोटे बच्चे हैं।
डेयरी उत्पादों के कारोबार से जुड़ी निजी क्षेत्र की एक बड़ी कंपनी ने पिछले दिनों दूध की थैली से लेकर दही, छाछ आदि अन्य दुग्ध उत्पादों के दाम बढ़ाने की घोषणा की थी। इससे कंपनी के इन उत्पादों की कीमतें बढ़ गई हैं।
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हालांकि, शहर में कई अन्य ब्रांडों का दूध भी बिक रहा है और उनके दाम नहीं बढ़ाए गए, लेकिन गर्मियों में दुग्ध उत्पादन कम हो जाने के कारण लोगों ने स्थानीय पैकिंग वाली दूध की थैलियां खरीदनी शुरू कीं तो फुटकर विक्रेताओं ने उनके भी बढ़े हुए दाम वसूलने शुरू कर दिए हैं।
सदर बाजार के कंफेक्शनरी व्यवसायी नरेश कौशल के अनुसार दूध की कमी को देखते अन्य कंपनियां भी दाम बढ़ाने की तैयारी कर रहीं हैं।
जन सामान्य की बात
हर साल गर्मी के सीजन में दूध की कमी का हवाला देकर थैलियों के दाम बढ़ा दिए जाते हैं, लेकिन बाद में मौसम बदलने पर दूध के दाम जस के तस रहते हैं। रोजाना एक किलो दूध लेने वाले परिवारों को अब माह में 150 रुपये ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे।
-मंजू ग्रोवर, रामनगर
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दूध की थैली के दाम बढ़ने पर अब डेयरियों के संचालक भी रेट बढ़ाएंगे, लेकिन उसके बाद भी शुद्ध दूध मिलने की कोई गारंटी नहीं है। आटा, चावल, दालें, खाद्य तेल आदि पर पहले महंगाई छाई है। अब दूध के दाम बढ़ने से घरेलू बजट बढ़ जाएगा।
-रोली गुप्ता, बहादुरगंज
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घर-घर दूध बेचने वाले दूधियों को भी अब दूध के दाम बढ़ाने का बहाना मिल जाएगा। लोग पानी की मिलावट से बचने के लिए खुला दूध लेने के बजाय थैली लेना पसंद करते हैं, लेकिन अब 25 रुपये वाली थैली 27 से 28 रुपये की बिक रही है।
-श्रेयांस सक्सेना, लोधीपुर
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दूध की कहीं कोई कमी नहीं है और यह सब डेयरी उत्पाद कंपनियों का झूठा प्रचार है। कंपनियों को रेट बढ़ाने के लिए कोई बहाना तो चाहिए। लगता है कि पेट्रोल डीजल की महंगाई का असर दूध तक आ गया है। कंपनियां परिवहन खर्च निकालने को दाम बढ़ा रहीं हैं।
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-अशोक कुमार, सिटी पार्क
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