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सरकारी खरीद केंद्रों के बाहर लगे माफियाओं के गेहूं के ढेर

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तिलहर। अधिकारी पंचायत चुनाव और कोरोना संक्रमण की वजह से व्यस्त हैं। इससे तिलहर मंडी समिति परिसर स्थित क्रय केंद्रों पर माफियाओं ने अपना कब्जा जमा रखा है। इससे किसान अपने गेहूं बेचने के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। मजबूरन उन्हें अपना गेहूं समर्थन मूल्य 1975 के बजाय 1700 रुपये प्रति क्विंटल बेचना पड़ रहा है।
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तिलहर मंडी समिति में आरएफसी के तीन, मंडी का एक, पीसीएफ के चार, एसएफसी का एक, पीसीयू के दो, यूपीएसएस का एक और एफसीआई का एक मिलाकर कुल 13 क्रय केंद्र हैं। यहां शुक्रवार तक लगभग 70 हजार क्विंटल गेहूं खरीद की जा चुकी है। तिलहर मंडी क्रय केंद्रों पर पहुंचने वाले किसानों से दो सौ रुपये क्विंटल टिप की मांग की जाती है। न देने पर किसान को मजबूरी में खुले बाजार में 1700 रुपए कुंटल गेहूं बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है।
मंडी समिति में अनाज से भरी ट्राली का ऑनलाइन टोकन कटना चाहिए, लेकिन पारदर्शिता के नाम पर ट्रालियों के मैनुअल टोकन काटे जा रहे हैं। इसके लिए बहाना साइड धीमी चलने का बनाया जा रहा है।
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गांव बंधिया के किसान नत्थू लाल, बंथरी निवासी जबर सिंह यादव, चावर खास निवासी नितेश शर्मा, वंथरा निवासी वेदप्रकाश और तिलोकपुर के किसान हरपाल सिंह ने बताया कि वे कई दिनों से मंडी में गेहूं लेकर आ रहे हैं, लेकिन केंद्रों पर सरकारी मूल्य न मिलने के कारण बाजार में 17 सौ रुपये में गेहूं बेच दिया है। केंद्रों पर किसानों की सुनने वाला कोई नहीं है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की व्यस्तता अधिक होने के कारण क्रय केंद्रों पर जाना नहीं हो पा रहा है। यदि केंद्रों पर किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है तब केंद्र प्रभारी के खिलाफ सीधी कार्रवाई की जाएगी। - सुरेंद्र सिंह, एसडीएम तिलहर।
केंद्रों पर कोई गड़बड़ी अभी मेरे संज्ञान में नहीं आई है। कंप्यूटर की साइड धीमी चलने के कारण मैनुअल टोकन काटे जाते हैं। गेट पर टैक्स चोरी की शिकायत की जानकारी आती है तब संबंधित के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाएगी। - जगदीश प्रसाद वर्मा, सचिव मंडी समिति तिलहर
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