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जलालाबाद में नहर की पटरी कटने से 70 बीघा की फसलें जलमग्न

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जलालाबाद (शाहजहांपुर)। पिछले कई महीने से सूखी पड़ी नहर में अचानक छोड़ा गया पानी किसानों के लिए मुसीबत का बन गया। शुक्रवार रात अचानक कलक्टरगंज वाली नहर में छोड़े गए पानी से जलालाबाद इलाके में दो-तीन स्थानों पर पटरी कट गई। इससे आसपास के खेतों में पानी भर गया और करीब एक दर्जन किसानों की 70 बीघा खेतों में खड़ी गेहूं, आलू, मसूर, सरसों की फसलें डूब गईं। शनिवार सुबह मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद मिट्टी डालकर नगर पटरी को ठीक किया।
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जलालाबाद इलाके से होकर गुजरने वाली कलक्टरगंज नहर पिछले कई महीने से सूखी पड़ी थी। ग्राम धियरा के पास झाले तक पहुंचने के लिए एक फार्मर ने नहर पाटकर रास्ता बना दिया था। शुक्रवार रात अचानक नहर में पानी छोड़ दिया गया। चूंकि ग्राम धियरा के पास नहर पटी हुई थी, जिसकी वजह से पानी आगे नही बढ़ सका। पानी का दबाव बढ़ने पर नहर की पटरी दो-तीन जगह से कट गई, जिससे नहर का पानी तेज बहाव के साथ खेतों में भर गया। शनिवार सुबह करीब पांच बजे नगरिया भुड़ गांव निवासी छविनाथ ने पानी में फसलें डूबी देखीं तो दंग रह गए। छविनाथ के सूचना देने पर तमाम ग्रामीण मौके पर जा पहुंचे। इसके बाद ग्रामीणों ने मिट्टी डालकर पटरी को बांधना शुरू किया। नहर अंदर बनी पटरी काटकर मिट्टी बाहर निकाली। ग्रामीण करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद सुबह करीब आठ बजे तक नहर की पटरी को ठीक कर पाए। मगर तब तक दर्जनों किसानों के खेतों में पानी भर गया, जिससे करीब 70 बीघा गेहूं, आलू और मसूर की फसलें जलमग्न हो गईं। कई किसानों ने अपने खेतों का पानी पंपिंग सेट लगाकर बाहर निकाला। मगर पानी की निकासी का रास्ता किसानों को खासी दिक्कत हुई। ग्रामीणों के मुताबिक नहर कटने की सूचना एसडीएम व क्षेत्रीय लेखपाल को सूचना दी गई, लेकिन कोई नहीं पहुंचा।
इन किसानों की फसलें हुई जलमग्न
छविनाथ की 12 बीघा आलू की फसल, रामकिशोर की 7 बीघा आलू की फसल, ब्रजपाल की 5 बीघा, हरिपाल की 20 बीघा आलू व गेहूं, राजपाल की 5 बीघा आलू व मसूर, नन्हें की 4 बीघा गेहूं, वेदपाल 6 बीघा आलू, तेजराम 5 बीघा आलू व गेहं और रामसेवक की 8 बीघा आलू की फसल डूब गई। गेहूं के खेतों में दो-चार दिन पहले ही बुआई हुई थी। किसानों के अनुसार गेहूं की फसल में पानी भरने से उसके पूरी तरह खत्म हो सकती है। ज्यादा दिन पानी भरा रहने से आलू भी सड़ जाएगा।
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बगैर सूचना के नहर में छोड़ दिया गया पानी
ग्रामीणों ने बताया कि नहर पिछले कई महीने से सूखी पड़ी थी। शुक्रवार रात नहर में पानी छोड़ा गया था, जिसकी कोई सूचना नहीं दी गई थी। पिछले साल इन्हीं दिनों पानी छोड़ा गया था। इसके बाद साल भर नहर सूखी पड़ी रही। पिछले साल अचानक छोड़े गए पानी से इसी नहर की पटरी कई स्थानों पर कट जाने के बाद दर्जनों ग्रामीणों की फसलें पानी मे डूब गई थी। पिछले साल यह पटरी गांव कुरेबंडा के पास कटी थी।
किसानों के बीच होने से बवाल
खेतों में जलभराव के बाद गांव नगरिया में बवाल होते-होते बचा। खेतों में भरे पानी की निकालने के लिए ग्रामीण अपने खेत की मेड़ काट रहे थे। एक किसान ने पानी निकाली के लिए मेड़ काटी। पड़ोसी किसान के खेत में आलू की खोदाई चल रही थी, जिससे उसने मेड़ काटने का विरोध किया। इससे दोनों किसानों के बीच विवाद होने लगा। कुछ ही देर में लाठी डंडे व फावड़ा लेकर दोनों परिवार आमने सामने आ गए, जिससे हंगामा होने लगा। एक परिवार के कुछ लोग असलहे लेकर पहुंच गए। परंतु इसी बीच पुलिस मौके पर जा पहुंची, जिससे बवाल होने से बच गया।
शुक्रवार को गुलड़िया गांव के पास नहर पटरी कटने की सूचना मिली थी, जिसके बाद नायब तहसीलदार व लेखपाल को मौके पर भेजकर पटरी को दुरुस्त करवा दिया था। शनिवार को दोबारा पटरी कटने की जानकारी मिली, जिसके बाद जांच हेतु लेखपाल को मौके पर भेजा गया। आपदा प्रभावित लोगों को मुआवजा देने का प्रावधान है, यह आपदा की श्रेणी में नहीं आता है। इसके बाद भी मामले का परीक्षण करवाया जा रहा है।
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- अजय कुमार तहसीलदार, जलालाबाद
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