फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिचौलियों पर नकेल कसे बगैर किसानों को नहीं मिलेगा समर्थन मूल्य

विज्ञापन
विज्ञापन
शाहजहांपुर। खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर धान की खरीद के लिए विभिन्न एजेंसियों को 133 क्रय केंद्र आवंटित किए गए हैं। इसके साथ ही खाद्य विपणन विभाग क्रय केंद्र खुलवाने की तैयारी मेें जुट गया है।
विज्ञापन

खास यह है कि इस बार शासन की धान क्रय नीति के अनुसार कर्मचारी कल्याण निगम, यूपी एग्रो और यूपीएसएस को सरकारी खरीद से बाहर रखा गया है। इस वर्ष इन तीनों क्रय एजेंसियों को 47 केेेंद्र आवंटित किए गए थे, लेकिन अब यह सेंटर दूसरी एजेेंसियों को दिए जाने हैं। अधिकारियों के अनुसार अभी शासन से जनपद को खरीद लक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ है, लेकिन गत वर्ष की भांति इस बार भी करीब चार लाख टन धान खरीद होने का अनुमान है। उधर, फसलों पर बढ़ी लागत के अनुरूप समर्थन मूल्य नहीं बढ़ने से परेशान किसानों का कहना है कि जब तक सेंटरों को बिचौलियों से मुक्त नहीं किया जाएगा, समर्थन मूल्य भी नहीं मिल पाएगा। बिचौलियों की वजह से क्रय केंद्रों पर बिक्री में काफी दिक्कत होती है। ऐसे में बिचौलियों को औने पौने दाम में धान बेच देते हैं। इससे समर्थन मूल्य भी नहीं मिल पाता है।
गत वर्ष लक्ष्य से अधिक हुई थी खरीद
गत वर्ष शासन से जिले को 3.61 लाख टन धान की सरकारी खरीद का लक्ष्य मिला था। लक्ष्य के अनुसार खरीद के लिए विभिन्न एजेंसियों को 171 केंद्र आवंटित किए गए। यह अलग बात है कि कई एजेंसियों के 25 केंद्र खरीद शुरू होने के एक माह बाद तक निष्क्रिय बने रहे। इसके बावजूद समर्थन मूल्य पर लक्ष्य से अधिक 415800.965 मीट्रिक टन खरीद हुई। पिछले साल की तरह इस वर्ष भी कृषि विशेषज्ञों ने धान की पैदावार सामान्य से अधिक होने का अनुमान लगाया है। इसलिए खाद्य विपणन विभाग ने सेंटरों की संख्या बढ़ाकर 180 कर दी, लेकिन शासन की क्रय नीति के अनुसार यूपीएसएस के 38, कर्मचारी कल्याण निगम के आठ और यूपी एग्रो का एक सेंटर खत्म कर दिया गया है। सरकारी खरीद से बाहर की गईं एजेंसियों के सेंटर अभी अन्य एजेंसियों को समायोजित नहीं किए गए हैं।
विज्ञापन

रात में गुलजार होते रहे मंडियों में क्रय केंद्र
समर्थन मूल्य पर खरीद को लेकर किसानों का संशय वाजिब है क्योंकि सीजन चाहे गेहूं खरीद का हो अथवा धान की खरीद का, ऐसे मौकों पर मंडियों में स्थापित क्रय केेंद्रों पर दिन के समय सन्नाटा पसरा रहता है, लेकिन रात में अधिकारियों के जाते ही खरीद पर दलालों का वर्चस्व हावी हो जाता है। गत वर्ष रबी सीजन में तिलहर मंडी समिति में रात के समय आढ़तियों से केंद्र प्रभारियों द्वारा गेहूं की खरीद किए जाने पर भारतीय कृषक दल के अध्यक्ष एवं जिला पंचायत सदस्य प्रमोद यादव ने कार्यकर्ताओं समेत कई दिन धरना दिया था। इसी तरह खरीफ सीजन में रोजा मंडी परिसर में रात के समय सेंटर पर तौल होते देख भाकियू के जिला अध्यक्ष महेंद्र सिंह यादव ने विरोध प्रदर्शन किया। इन मामलों में केंद्र प्रभारियों पर सिर्फ निलंबन की कार्यवाही हुई और बाद मेें उन्हें बहाल कर दिया गया।
क्रय एजेंसी वार स्वीकृत केंद्र
------------------
क्रय एजेंसी स्वीकृत केंद्र
आरएफसी 31
पीसीएफ 38
पीसीयू 35
एसएफसी 12
नैफेड 10
एफसीआई 07
00000000000000000000
खाद, बीज, डीजल आदि के दाम बढ़ने से धान पर प्रति एकड़ 20 हजार रुपये लागत आई और 24 क्विंटल पैदावार हुई। इसे देखते समर्थन मूल्य 1868 रुपये के बजाय कम से कम दो हजार रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए। समर्थन मूल्य में मामूली वृद्धि किसानों के साथ धोखा है।
- ओमकार सिंह यादव, निगोही
सरकार की लचर व्यवस्था और अधिकारियों की लापरवाही के कारण बीते पांच वर्ष से क्षेत्र के अधिकांश क्रय केंद्र आढ़तियों के कब्जे में रहे और नेतानगरी हावी रही। सरकार ने समर्थन मूल्य ज्यादा नहीं बढ़ाया और जो बढ़ा है, उसका लाभ किसानों को देने के लिए बिचौलियों पर रोक लगानी होगी।
- अजफर अली, पतराजपुर (निगोही)
हर साल धान खरीद शुरू होने पर अधिकारी किसानों के हित की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन हकीकत से उनका कोई वास्ता नहीं होता। धान के बढ़े समर्थन मूल्य का लाभ मिलना तभी संभव है, जब क्रय केंद्रों को नेताओं की पकड़ से दूर रखने को ठोस कदम उठाए जाएंगे।
- फहीमउज्जमा खां, उदारा (निगोही)
खाद, डीजल आदि के मूल्य बढ़ने की वजह से धान की फसल तैयार करने में लागत बढ़ी है। इसके बावजूद सरकार ने समर्थन मूल्य में केवल 60-70 रुपये ही बढ़ाए हैं। इससे किसानों का हित नहीं होगा। धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य दो हजार रुपये होना चाहिए।
- रोहित कुमार, गुरगवां (निगोही)
सेंटरों को खोलने की पूरी तैयारी कर ली गई है। खरीद शुरू होने पर क्रय केंद्रों को बिचौलियों से मुक्त रखने के लिए डीएम ने जिला स्तरीय अधिकारियों को नोडल और सुपर नोडल अधिकारी नामित करने का निर्णय किया है। प्रत्येक पांच केंद्र पर नोडल और 15 केंद्रों पर सुपर नोडल अधिकारी नियुक्त होंगे जो कि प्रतिदिन क्रय केंद्रों का पर्यवेक्षण कर अपनी लोकेशन के रिपोर्ट डीएम को देंगे। सेंटरों पर केवल उन्हीं किसानों का धान तोला जाएगा, जिन्होंने रजिस्ट्रेशन कराया होगा। अभी तक 15109 किसान पंजीकरण करा चुके हैं।
विज्ञापन

- कमलेश पांडेय, उप संभागीय खाद्य विपणन अधिकारी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें