शाहजहांपुर। भक्तों के लिए कोरोना महामारी में बंद किए मंदिरों के कपाट शासन के निर्देश पर सोमवार से खोल दिए जाएंगे। मंदिर कमेटियों की ओर से भक्तों के लिए एहतियातन कुछ दिशा निर्देश जारी किए गए हैं, जिनका पालन करना सभी के लिए जरूरी होगा।
खासतौर पर मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना जरूरी होगा, इसके लिए मंदिर में एक समय में अधिकतम चार लोगों को ही दर्शन करने और प्रसाद आदि चढ़ाने के लिए अनुमति दी जाएगी। साथ ही मंदिर में घंटा, शंख बजाना भी प्रतिबंधित रहेगा, देव प्रतिमाओं को कोई हाथ नहीं छुएगा और प्रसाद दूर से ही दिखाकर वापस घर ले जाया जाएगा। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं लगने दी जाए। सभी श्रद्धालु मास्क लगाकर ही मंदिर में प्रवेश कर सकेेंगे, मास्क बच्चों और महिलाओं को भी लगाना जरूरी होगा।
मंदिर समितियों के पदाधिकारियों और पुजारियों का कहना है कि मंदिर में दर्शनार्थ पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के हाथ धोने और सेनेटाइजिंग की व्यवस्था भी मंदिर में विशेष रूप से की जा रही है, ताकि किसी को कोई परेशानी न हो। मंदिर के बाहर लगने वाली फूल, प्रसाद आदि की दुकानों पर भी सभी को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना अनिवार्य होगा। इस संबंध में शनिवार को थाना सदर बाजार में एडीएम प्रशासन राम सेवक द्विवेदी और एसपी सिटी ने विशिष्टजनों की बैठक लेकर आवश्यक दिशा निर्देश देते हुए शासन क ी मंशा से भी अवगत कराया।
मूर्ति स्पर्श और प्रसाद चढ़ाना प्रतिबंधित
शहर के प्रमुख बाबा विश्वनाथ मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष राज कुमार खंडेलवाल ने बताया कि आठ जून से श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे। मंदिर में प्रवेश के लिए मास्क लगाना बहुत आवश्यक होगा। मंदिर मेें एक द्वार से प्रवेश और दूसरे से निकास की व्यवस्था रहेगी। हाथ धोने के लिए तीन नल संचालित रहेंगे, ताकि एक नल पर भीड़ न जुट सके। सेनेटाइजर के लिए स्टाल लगाया जाएगा। कोई भी श्रद्धालु मूर्तियों को स्पर्श नहीं करेगा और जल भी नहीं चढ़ाएगा। शंख, घंटा बजाना भी प्रतिबंधित किया गया है। पुजारी के माध्यम से प्रसाद भी नहीं चढ़वाया जाएगा।
हनुमतधाम में भी करना होगा नियमों का पालन
हनुमतधाम मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष विनोद अग्रवाल ने बताया कि सोमवार से श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट सुबह छह बजे से खोले जाएंगे। बिना मास्क लगाए किसी भी श्रद्धालु को मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए हाथ-मुंह धोने और सेनेटाइजर की व्यवस्था मंदिर में उपलब्ध रहेगी। मंदिर में देव प्रतिमाओं का स्पर्श और प्रसाद वितरण नहीं करने दिया जाएगा। अग्रवाल ने बताया कि मंदिर के गर्भगृह में एक साथ अधिकतम पांच श्रद्धालुओं को दर्शन करने की अनुमति दी जाएगी। नए पुल की ओर से ही मंदिर में प्रवेश मिल सकेगा।