शाहजहांपुर। ईद के मौके पर बाजारों में एक सप्ताह पहले से त्योहार की खरीददारी शुरू हो जाती है। लोग खाने पीने की चीजों के अलावा कपड़ों, जूते-चप्पलों आदि की खरीदारी करते हैं। पिछले वर्ष ईद के पर करीब 20 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था, लेकिन इस बार कोरोना संकट को देखते लॉकडाउन के कारण शुरू से बाजार फीका रहा। पिछले साल की तुलना में इन सभी वस्तुओं की 50 फीसदी बिक्री भी नहीं हो पाई। जिले मेें कपड़े और रेडीमेड वस्त्रों की करीब एक हजार दुकानें हैं। इनमें से अधिकांश दुकानदारों को ईद पर कोरोना की मार सहनी पड़ी। फुटवियर की दुकानों पर भी ग्राहक बहुत कम पहुंचे।
कपड़ा और साड़ी की नहीं हुई ज्यादा मांग
ईद पर भी नमाज के लिए नए कपड़े सिलवाने की रिवायत है। इस बार चूंकि कोरोना से बचाव को लॉकडाउन लागू होने से कपड़ा बाजार सिर्फ पांच घंटे खुल रहा है। दुकान खोलकर सजाने और बढ़ाने में भी एक घंटा खर्च हो जाता है। इस तरह बिक्री के लिहाज से सिर्फ चार घंटे मिल रहे हैं। महानगर समेत जिले में कपड़े और साड़ी के ब्रांडेड शोरूम समेत करीब पांच सौ दुकानें हैं और त्यौहारी मौकों पर करीब एक सप्ताह तक हर दुकान पर 25000 रुपये की बिक्री होती है। इस हिसाब से करीब 8.75 करोड़ रुपये कपड़ा कारोबार होने का अनुमान था, लेकिन बिक्री 70 प्रतिशत कम हुई। कपड़ा व्यापारियों के अनुसार जुमा अलविदा से ईद के दिन तक ग्राहकों की भीड़ से फुर्सत नहीं मिलती थी, लेकिन इस बार ज्यादातर खरीददार घरों पर रहे।
रेडीमेड वस्त्रों का धरा रहा 60 फीसदी स्टॉक
मुसलिम समाज के जो लोग नौकरी या फिर कामकाजी होने के नाते अन्य शहरों मेें रहते हैं, उनमें से ज्यादातर लोग कपड़े सिलवाने के बजाय सिले-सिलाए कपड़े साथ खरीद कर घर लाते हैं। इस बार लॉकडाउन में तमाम लोग बाहर फंसे रह गए और त्यौहार मनाने को रकम घरवालों के खातों में ट्रांसफर कर दी। रेडीमेड वस्त्र विक्रेेताओं को इन्हीं लोगों से मुनाफा कमाने की उम्मीद थी। कारोबारियों के अनुसार जिले में रेडीमेड कपड़ों की 500 दुकानें हैं और खास मौकों पर रोजाना एक करोड़ की बिक्री हो जाती है, लेकिन इस बार कपड़ों की मांग की मांग करीब 60 प्रतिशत घट गई। एक सप्ताह की बिक्री का आंकलन करें तो रेडीमेड वस्त्र व्यवसाय बमुश्किल 2.80 करोड़ रुपये तक सीमित रहा।
जूते, चप्पल और सैंडल की नहीं रही मांग
ईद मिलने मेहमानों के घर जाते वक्त हर कोई पैरों में नई चमचमाती चप्पलें, जूते, सैंडल पहनना चाहता है। गुजरे सालों की मांग को देखते इस बार भी फुटवियर विक्रेताओं ने आगरा, लखनऊ , दिल्ली आदि शहरों से थोक में काफी माल मंगा लिया। इसके लिए ई-पास हासिल करने को कारोबारियों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ी, लेकिन बिक्री के नतीजे मायूस करने वाले रहे। जिले में 400 से ज्यादा फुटवियर शॉप हैं और उन पर ईद जैसे मौकों पर पांच से आठ हजार रुपये की औसत बिक्री हो जाती है। इस बार भी दुकानदारों ने बिक्री के इसी ग्राफ की उम्मीद लगाई, लेकिन उनका कहना है कि पौने दो करोड़ का कारोबार 50-52 लाख रुपये तक सीमित रहा।
लॉकडाउन में शादी-विवाह के आयोजन स्थगित होने से सहालगी सीजन के लिए मंगाया गया माल ईद पर बिकेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। प्रशासन की अपील को तरजीह देते हुए ज्यादातर लोग घरों में रहे। बिक्री आगे भी हो जाएगी, लेकिन यह अच्छी बात है कि लोगों ने अपनी और दूसरों की सेहत का ख्याल रखा।
-सुनील तुली, कपड़ा कारोबारी
शादियां थमने के बाद ईद से थोड़ी कारोबारी उम्मीद थी, लेकिन वह भी जाती रही। लॉकडाउन खुलने के बाद बिक्री बढना तय है। माल की कोई कमी है क्योंकि सहालगी सीजन का स्टॉक बचा हुआ है। दिल्ली और लुधियाना के मार्केट खुल गए हैं, लेकिन नया माल तभी लाएंगे, जब बाजार पटरी पर लौटेगा।
-हनी सिंह, रेडीमेड वस्त्र कारोबारी
ईद पर कपड़ों की तरह नए जूते चप्पल पहनने का लोगों में काफी क्रेज होता है। यही सोंचकर काफी माल मंगा लिया, लेकिन उस हिसाब से ग्राहक दुकान पर नहीं चढ़े। लॉकडाउन में बिक्री और खरीददारी को उतना यम नहीं मिल रहा। अब धूप इतनी तेज हो रही है कि लोग निकलना पसंद नहीं कर रहे।
-बब्बू खां, फुटवियर व्यवसायी