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दूध में मिला डिटर्जेंट और चाऊमीन के सॉस में घातक रंग

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शाहजहांपुर। सेहत बनाने के लिए दूध पीते हैं तो आपको सजग होने की जरूरत है, क्योंकि दूध में गाढ़ापन लाने के लिए डिटर्जेंट पाउडर मिलाया जा रहा है, जो सेहत बनाने की बजाय बिगाड़ सकता है। इसके साथ ही मिठाइयों और फास्ट फूड खाने के शौकीनों को भी बेहद चौक्कना रहने की जरूरत है। मिठाइयों को आकर्षक बनाने के लिए उनमें ऐसे रंग डाले जा रहे हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं। फास्ट फूड बनाने में भी ऐसा सॉस इस्तेमाल हो रहा है, जिसमें लेड की भारी मात्रा पाई गई है। इसकी पुष्टि दशहरा और दिवाली के दौरान लिए गए नमूनों की प्रयोगशाला से आई रिपोर्ट से हुई है। परीक्षण में करीब एक दर्जन नमूने अधोमानक पाए गए हैं। तिलहर में दुग्ध संग्रह केेंद्र से लिए गए दूध के नमूने में कपड़े-बर्तन धोने मेें इस्तेमाल होने वाला डिटर्जेंट पाउडर पाया गया है।
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तिलहर से बरेली और आंवला सप्लाई किया जाता है दूध
अक्तूबर 2019 मेें अभियान के दौरान तिलहर में संचालित दुग्ध संग्रह केंद्र पर छापे के दौरान वहां टैंक में जमा दूध का नमूना लिया गया था। इस नमूने की प्रयोगशाला में जांच कराने पर पता चला कि उसमें कास्टिक का अंश है। प्रयोगशाला मेें रासायनिक जांच से दूध में डिटर्जेंट पाउडर मिले होने की पुष्टि हुई। दुग्ध संग्रह केंद्र के संचालक जय सिंह से खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने पूछताछ की तो पता चला कि मिल्क कलेक्शन सेंटर पर इकट्ठा होने वाला दूध बरेली और आंवला में उन लोगों को सप्लाई किया जा रहा है, जो अपने ब्रांड नेम से दूध की पैकेजिंग कराकर उसे बाजार में सप्लाई करते हैं।
चाऊमीन सॉस में हानिकारक रंग की मिलावट
बाजार में ठेलों पर बिकने वाले फास्ट फूड का स्वाद लेने से पहले यह जरूर देख लें कि उनमें हानिकारक रंग की मिलावट वाले सॉस का इस्तेमाल तो नहीं हो रहा है क्योंकि स्ट्रीट फूड के ऐसे ठिकानों पर विक्रेता सस्ता माल देने के लिए क्वॉलिटी की कोई परवाह नहीं करते। दशहरा मेला के दौरान ओसीएफ रामलीला ग्राउंड पर चाऊमीन के ठेले से लिए सॉस के नमूने की जांच कराने पर उसमें ऐसा अखाद्य रंग पाया गया, जिसमें लेड जैसा भारी तत्व मिला है। प्रयोगशाला जांच में चाऊमीन सॉस का यह नमूना भी मानव स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित (अनसेफ) बताया गया है।
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पनीर और दूध के कई नमूने पाए गए अधोमानक
दिवाली से पहले सदर बाजार चौराहा के पास से लिए पनीर के नमूने की जांच में उसमें फैट वजन की तुलना में कम पाया गया, इससे जाहिर हुआ कि पनीर चिकनाई निकाले हुए दूध को फाड़कर बनाया गया है। इसी तरह महानगर मेें विभिन्न स्थानों से लिए गए दूध के तीन नमूने मिल्क फैट कम पाए जाने पर जांच में सब स्टैंडर्ड घोषित किए गए। ऐसा दूध स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भले ही न हो, उसे पीकर सेहत नहीं बनाई जा सकती क्योंकि उसमें क्रीमयुक्त प्रोटीन पहले ही निकाल लिया जाता है। यही नहीं, बरेली मोड़ से लिए गए क्रीम के दो नमूने भी जांच में अधोमानक पाए गए क्योंकि उनमें वजन बढ़ाने के लिए मिल्क फैट की मिलावट पाई गई।
पैकेजिंग और लेबलिंग में भी हो रही गड़बड़ी
दुकानदार विभिन्न खाद्य वस्तुओं की पैकेजिंग और लेबलिंग में भी गड़बड़ी कर रहे हैं। शारदीय नवरात्र से पहले सदर बाजार की किराना शॉप से काजू पैकेट और कूट्टू आटा पैकेट के नमूने लिए गए थे। प्रयोगशाला जांच में दोनों खाद्य वस्तुओं की गुणवत्ता पर कोई टिप्पणी नहीं की गई, लेकिन उनकी पैकेजिंग और लेबलिंग संदिग्ध मानी गई। अधिकारियों के अनुसार खाद्य वस्तुओं के पैकेट पर पैकिंग तिथि, वजन, एमआरपी, निर्माता का नाम एवं पता (प्लाट नंबर एवं पिनकोड सहित) स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए और इसका पालन नहीं होने पर विक्रेताओं से जुर्माना वसूले जाने का प्रावधान है।
नमूने असुरक्षित पाए जाने पर उम्र कैद का प्रावधान
खाद्य वस्तुओं के नमूने स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित पाए जाने पर दुकानदार को उम्र कैद तक हो सकती है। दूध एवं चाऊमीन सॉस के दोनों असुरक्षित नमूनों को लेकर संबंधितों के खिलाफ न्याय निर्णायक अधिकारी (एडीएम प्रशासन) के कोर्ट में मुकदमे दायर कराए जा रहे हैं। जो नमूने अधोमानक पाए गए हैं, उनके वाद भी दायर होने की प्रक्रिया में हैं और इन मामलों में विक्रेताओं पर जुर्माना होना तय है। - विजय कुमार वर्मा, अभिहीत अधिकारी, खाद्य सुरक्षा विभाग
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