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शारदा के जल बचेगा से भैंसी नदी का अस्तित्व

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बंडा। करीब एक दशक से सूखी पड़ी गोमती की सहायक भैंसी नदी के दिन बहुरने वाले हैं। पांच किमी लंबे नाले के जरिए भैंसी नदी को शारदा नहर से जोड़ा जाएगा। शारदा का पानी भैंसी नदी में छोड़े जाने से दर्जनों गांवों के किसानों को खेती की सिंचाई के लिए फायदा होगा। लोक भारती संगठन भैंसी नदी को शारदा नहर से जोड़ने वाले नाले की सफाई करने में जुटा है। सोमवार को वहां पहुंचे डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने मातहत अधिकारियों के साथ नाले की सफाई की। डीएम को नाले की सफाई करते देख ग्रामीण भौचक्के रह गए।
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यह नदी पीलीभीत की पूरनपुर तहसील के डंडरौल व शाहजहांपुर की सीमा से लगी करीब 50 वर्ग किमी में फैली भैंसासुर झील से निकली है। वहां से चलकर करीब 42 किमी लंबी भैंसी नदी लखीमपुर खीरी के इमलिया घाट के पास गोमती में मिल जाती है। भैंसी को गोमती की सहायक नदी कहा जाता है। करीब तीन दर्जन गांवों के हजारों परिवारों और जीव-जंतुओं को जीवन देने वाली भैंसी नदी करीब एक दशक से अस्तित्व विहीन पड़ी है। नदी सूखी पड़ी रहने से आसपास के किसानों ने अवैध कब्जा कर रखा है। रेत का अवैध खनन भी खूब किया जाता है।
भैंसी नदी और शारदा नहर के बीच करीब पांच किमी लंबा नाला है, जो बंडा इलाके के रामदेवरी गांव के पास से गुजरता है। लोक भारती संगठन ने इस नाले के जरिए शारदा नहर से जोड़ने के लिए नाले की सफाई करने की योजना बनाई। इस संगठन के सदस्य रविवार को नाले की सफाई को जुटते हैं। सोमवार को मणि मंदिर के पास संस्था सदस्यों के साथ डीएम, सीडीओ व अन्य अधिकारियों ने फावड़े से नाले की सफाई की।
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इस मौके पर डीएम ने कहा कि सरकारी एवं गैर सरकारी संगठन के साथ स्थानीय लोगों के सहयोग से भैंसी नदी की सफाई कराई गई है। भैंसी नदी में पानी छोड़े जाने के लिए शारदा नहर से जोड़ा जाएगा। जल संरक्षण करके भैंसी नदी का अस्तित्व बचाया जा सके। इस मौके पर पुवायां एसडीएम सौरभ भट्ट, लोकभारती संगठन के अध्यक्ष विजय पाठक, संयोजक गोपालजी आदि थे।
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