शाहजहांपुर। विश्व कला दिवस 15 अप्रैल को मनाया जाता है। तमाम कलाकार कला के माध्यम से खुद को स्थापित कर चुके हैं। तो बहुत से युवा खुद की पहचान बनाने के लिए संघर्षरत हैं। शहर के सैफ असलम खां, मनीषा दीक्षित व रजनी जैसे युवाओं ने अपनी कला के माध्यम से खुद की पहचान बनाई है।
अमर उजाला ने छापा था सैफ का पहला कार्टून, आज उनके डूडल को मिले 30 हजार सर्च
कार्टूनिस्ट सैफ असलम खां जब पांचवीं क्लास में थे तब ‘अमर उजाला’ में बच्चों का कोना नामक कॉलम में उनका पहली बार कार्टून छपा था। दसवीं क्लास में वह राजनीतिक कार्टून बनाने लगे। बताते हैं कि कार्टूनिस्ट बनने की प्रेरणा उन्हें अपने पापा से मिली। स्नातक के बाद दिल्ली गए, वहां कई टीवी और फिल्म प्रोडक्शन हाउस में बतौर आर्ट डायरेक्टर का काम किया। कई कार्टून फिल्म व टीवी ऐड भी बनाए।
दो साल पहले गूगल ने उनके डूडल को दुनियाभर में 30 करोड़ सर्च में नंबर एक पर रखा। सैफ अलसम के काम को पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, मशहूर चित्रकार एमएफ हुसैन, सतीश गुजराल, अभिनेता आमिर खान जैसे लोग सराह चुके हैं। उनका मानना है कि कला ही है, जिसमें मानव मन में संवेदनाएं उभारने, प्रवत्तियों को ढालने तथा चिंतन को मोड़ने, अभिरुचि को दिशा देने की अद्भुत क्षमता है।
कला से लोगों को परेशानियों से निजात दिलाने की पहल कर रही हया
निगोही की रहने वाली हया कय्यूम को बचपन से ही कला का बहुत शौक रहा है। उन्होंने बचपन में बहुत सारे कार्टून बनाए, इसके लिए उन्हें कागज की जरूरत भी नहीं होती। जब कुछ बनाना होता तो कहीं पर भी बना देती थी। बताया कि जब वह बहुत छोटी थी, तब एक बेकार पड़े बड़े बैनर पर तीन वोडाफोन के कार्टून बनाए थे, इसी तरह बचपन में कई कार्टून बनाए और बड़े होते-होते कला का शौक भी बढ़ता गया।
उन्होंने स्नातक व परास्नातक की पढ़ाई कला विषय से की और फिर बॉम्बे आर्ट किया। कई प्रदर्शनियों में भाग ले चुकी हैं। हया का कहना है कि वह भविष्य में कला से ही पीएचडी करना चाहती हैं। उनका बनाया निगोही के रेलवे स्टेशन का स्केच, लोगों को काफी पसंद आया था जो कि रेल यात्रियों की परेशानियों से जुड़ा था। उनका कहना है कि वह अपनी कला के माध्यम से लोगों को परेशानियों से निजात दिलाने की पहल कर रही हैं।
ललित कला अकादमी व राष्ट्रीय कला प्रतियोगिता में पुरस्कृत हो चुकीं रजनी
कला के माध्यम से रजनी भी खुद की पहचान बनाने में जुटी हुई हैं। उन्होंने चित्रकला से एमए किया है। बताती हैं कि बचपन में जब उनका विद्यालय में प्रवेश हुआ, तब वहां कुछ ही विषय थे। रेखाचित्र उनके जीवन का महत्वपूर्ण विषय बना। उन्होंने उंगलियों चित्रकला विषय से ही स्नातक और परास्नातक किया। बताया कि बरगद रूपी गुरुजनों की छत्रछाया में चित्रकारी के बारीक गुणों को सीखा।
निरंतर यही कोशिश रहती है कि उनका चित्र महज चित्र न होकर एक कहानी अपने अंदर समेटा हो। जो समाज को एक दिशा प्रदर्शित कर रहा हो। अपनी चित्रकाली के दम पर उन्होंने 2019 में ललित कला अकादमी, 2021 में नगर निगम शाहजहांपुर और 2019 में राष्ट्रीय कला प्रतियोगिता से पुरस्कार प्राप्त किए हैं।
लनखऊ में खुद का स्टूडियो चला रहीं मनीषा
जमौर निवासी दयाशंकर दीक्षित की बेटी मनीषा दीक्षित ने बरेली कॉलेज से ड्राइंग और पेंटिंग में एमए किया है। इसके बाद वह जीजीआईसी में व्याख्याता के रूप में कार्य किया। आर्य महिला डिग्री कॉलेज में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्य किया और वर्तमान में समय में ललित कला अकादमी, क्षेत्रीय केंद्र, लखनऊ में एक कलाकार के रूप में कार्यरत हैं। विभिन्न समूह और एकल परियोजनाओं पर अन्य प्रतिष्ठित कला दीर्घाओं और स्टूडियो के साथ भी काम कर रहीं हैं। लखनऊ के इंदिरा नगर में उनका स्टूडियो है।
मनीषा ने बताया कि उन्होंने विभिन्न प्रदर्शनियों व कार्यशालाओं में हिस्सा लिया। इनमें बरेली, लखनऊ में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय कला एवं चित्रकला कार्यशालाएं रहीं। उनकी कला वास्तविक जीवन की यादों और सपनों के विभिन्न अंशों से प्रेरित है। जोकि उन्हें हमेशा चीजों को देखने के लिए उत्साहित करती थी। बताया कि तेल, एक्रेलिक, पेस्टल, चारकोल, पेंसिल सीखी है।