जनता और पुलिस के बीच की सबसे अहम कड़ी चौकीदारों की जिंदगी गुलामों जैसी हो गई है। उन्हें न तो जनता के बीच सम्मान मिल पा रहा है और न ही पुलिस उनकी इज्जत करती है। उन्हें मानदेय भी मनरेगा श्रमिकों से कम दिया जाता है।
चौकीदारों के मुताबिक, थानों में उनसे सफाई कर्मी का काम लिया जाता है। इसके अलावा रात में गश्त करने के बाद दिन में थाने में रहने को कहा जाता है। इसके अलावा थानेदार से लेकर सिपाही तक की जी हुजूरी करनी पड़ती है। चौकीदारों को पुलिस से तकलीफ तो है ही, गांव के लोग भी उनसे मुखबिरी का शक करते हुए रंजिश मानने लगते हैं। पुलिस को गांव के असामाजिक तत्वों की सूचना मिलने पर उनका शक चौकीदार पर ही जाता है। कई लोग तो उन्हें धमकाते भी हैं। पुलिस से कहे जाने पर भी उनकी कोई मदद नहीं की जाती।
मानदेय के मामले में भी चौकीदारों को भी मनरेगा श्रमिकों से भी कम पैसा मिलता है, जबकि ड्यूटी ज्यादा करनी पड़ती है। पुलिस की आंख और कान होने के बाद भी चौकीदारों की उपेक्षा से यह लोग अपने काम में कोताही बरतने लगे हैं। इससे पुलिस को समय से सही सूचनाएं नहीं मिल पाती हैं।
चौकीदारों का पूरा ध्यान रखा जाता है। चौकीदार पुलिस के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। वे पुलिस का ही अंग हैं। किसी चौकीदार को शिकायत हो तो वह मुझसे मिलकर अपनी बात रख सकता है।
- अशोक कुमार, कोतवाली प्रभारी पुवायां
‘चौकीदारों का सम्मान सर्वोपरि’
पुवायां। कोतवाली प्रभारी अशोक कुमार ने रविवार को चौकीदारों की बैठक बुलाई। उन्होंने कहा कि चौकीदारों का सम्मान सर्वोपरि है, इससे समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने गांवों में कच्ची शराब बनाने वालों, सर्वाजनिक जगहों पर कब्जा करने वालों और समाज में अशांति फैलाने वालों के बारे में समय पर पुलिस को सूचना देने की चौकीदारों से अपेक्षा की।