शाहजहांपुर। एमपीएमएलए कोर्ट के फैसले से दोनों पक्ष संतुष्ट नजर आए। दुष्कर्म के मामले में बरी होने से जहां चिन्मयानंद को राहत मिली तो वहीं रंगदारी का केस खत्म होने से छात्रा, भाजपा के दो नेताओं और तीन अन्य आरोपियों ने भी राहत की सांस ली है। दोनों ही पक्ष आगे कोई कार्रवाई नहीं चाहते हैं। फिलहाल फैसले के खिलाफ अपील की बात कोई पक्ष नहीं कर रहा।
अगस्त 2019 में एसएस लॉ कॉलेज की एलएलएम की छात्रा ने पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री चिन्मयानंद पर दुष्कर्म का आरोप लगाकर हड़कंप मचा दिया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित एसआईटी ने चार नवंबर 2019 को चिन्मयानंद के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 (सी), 354 (डी), 342 और 506 में आरोप पत्र दाखिल किया था। इस मामले की सुनवाई लखनऊ में एमपीएमएलए कोर्ट में चल रही थी। वहीं दूसरे पक्ष से छात्रा, सचिन, संजय, दुर्गेश उर्फ विक्रम, भाजपा नेता अजीत सिंह और डीपीएस राठौर के खिलाफ आईपीसी की धारा 385, 506, 507, 201 व आईटी एक्ट की धारा 67 ए के तहत आरोप पत्र दाखिल किया था।
26 मार्च 2021 को एमपीएमएलए कोर्ट ने दोनों मामलों में फैसला सुनाते हुए सभी को दोषमुक्त कर दिया था। पांच करोड़ की रंगदारी मांगने के मामले में भी सभी आरोपी दोषमुक्त करार दिए गए। छात्रा के वकील प्रताप सिंह ने बताया कि फैसले से वह और उनकी मुवक्किल छात्रा संतुष्ट हैं। अब ऊपरी अदालत में जाने का कोई विचार नहीं है। जबकि दूसरी ओर चिन्मयानंद भी किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं चाहते हैं। उनका कहना है कि डेढ़ साल चला मामला अदालत के निर्णय के बाद अब पूरी तरह खत्म हो गया है। अदालत के निर्णय पर सभी ने खुशी और संतुष्टि जताई है।
चिन्मयानंद के वकील ओम सिंह ने कहा कि न्याय की जीत हुई है। छात्रा ने दबाव में आकर आरोप लगाए थे। बाद में उसके सच बयान करने पर अदालत ने चिन्मयानंद के पक्ष में फैसला सुनाया है। वहीं, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष डीपीएस राठौर ने कहा कि 31 मार्च के बाद अदालत के फैसले की कॉपी मिलने के बाद वह आगे की कार्रवाई पर विचार करेंगे।