शाहजहांपुर। कोरोना काल के बीच सोमवार से कक्षा नौ से 12 तक के छात्र-छात्राओं की पढ़ाई शुरू हो गई। सात महीने बाद स्कूल पहुंचे बच्चों को गेट पर हाथों को सैनिटाइज करवाया, तो वहीं मास्क लगाकर आने वाले पर ही प्रवेश मिला। दो शिफ्टों में कक्षाएं चली। इस दौरान बच्चे और उनके शिक्षक मुंह पर मास्क लगाए रहे। उनके बीच सामाजिक दूर बनाए रखने के लिए सीटिंग प्लान से ही बच्चों को बैठाया गया। हालांकि अभिभावकों से मिले स्वीकृति के बाद भी विद्यार्थियाें की संख्या काफी कम रही। इधर, अधिकतर निजी स्कूल बंद रहे जो खुले भी उसमें बच्चे नहीं आए। निजी कॉलेज संचालकों ने बच्चों को ऑनलाइन ही पढ़ाई कराई।
सोमवार को एसपी कॉलेज के गेट पर छात्रों के थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही थी। सभी छात्रों की स्क्रीनिंग के बाद उनके हाथों को सैनिटाइज कराया गया। इसके बाद ही उन्हें विद्यालय के अंदर प्रवेश दिया गया। विद्यालय के शिक्षकों ने बताया की पहले दिन छात्रों की संख्या काफी कम रही है।
आर्य कन्या इंटर कॉलेज सोमवार को सुबह स्कूल खुलने पर सैनिटाइजेशन का काम होता मिला। पहले दिन विद्यालय में एक भी छात्रा नहीं पहुंची। प्रधानाचार्य ने बताया कि अभी अभिभावकों की ओर से स्वीकृति पत्र प्राप्त नहीं हुए हैं जिसकी वजह से छात्राएं नहीं आई है।
जीआईसी में सोमवार को सीटिंग प्लान के हिसाब से छात्रों को बैठाया गया था। सभी के मुंह पर मास्क लगा मिला। प्रधानाचार्य रणवीर सिंह ने बताया कि कक्षा 9 और 10 के छात्रों की संख्या 460 के करीब हैं जिसमें से 230 के स्वीकृति पत्र प्राप्त हुए थे, लेकिन आने वालों की संख्या 132 ही रही।
गुरु नानक स्कूल में सोमवार को कक्षाएं लगीं, छात्र-छात्राएं को सीटिंग प्लान के अनुसार बैठाया गया था। प्रधानाचार्य ने बताया कि कक्षा नौ के 35 बच्चों के सहमति पत्र प्राप्त हुए थे, पहले दिन उनमें से चार ही विद्यालय आए। जबकि कक्षा 10 के 27 छात्र-छात्राओं में आठ की उपस्थिति रही।
लॉकडाउन लगने पर स्कूल बंद हो गए थे। आज विद्यालय आने का अवसर मिला है। पहले दिन शिक्षकों ने अपने विषय के अनुसार पढ़ाया। - अमन ठाकुर
करीब सात महीने बाद विद्यालय आने का अवसर प्राप्त हुआ। इतने दिनों तक सहपाठियों से मिलना जुलना नहीं हो पाया था। आज स्कूल आ कर अच्छा लगा। - अमन मिश्रा
इतने दिनों बाद स्कूल आए हैं। शिक्षकों ने पढ़ाया और मित्रों से मिलना हो गया। कोरोना की वजह से हम लोगों की पढ़ाई पर काफी प्रभाव पड़ा। नियमित स्कूल खोला जाए। - दीपेश कुमार
आज से पहले सहमति पत्र देने के लिए स्कूल आना हुआ था। उसके बाद अब आए हैं। उनके साथ की सहेलियां भी मिल गई हैं। कई दिनों बाद टीचर से पढ़कर अच्छा लगा। - चांदनी